पर्वत  

पर्वत निर्माण की अवस्थाएँ

पर्वत उत्पत्ति ओर विकास की निम्नलिखित अवस्थाएँ हैं :-

  • भू-अभिनति का होना, जिसमें पदार्थ जमा होता रहे तथा साथ ही तली निरंतर नीचे धँसती रहे।
  • महाद्वीपीय निर्माणकारी शक्तियों द्वारा पदार्थ का ऊपर उठना।
  • पर्वत न शक्तियों के द्वारा पदार्थ में मोड़ पड़ना।
  • पार्श्व शक्तियों का अत्यधिक प्रभाव पड़ना और मोड़ों की अधिकता।

पर्वत निर्माण की अंतिम अवस्था

पर्वतों का ऊपर उठना, अत्यधिक मोड़ के कारण दरारें पड़ना, पार्श्व से अत्यधिक दबाव के कारण टूटे पदार्थ का दूर जाकर गिरना।


पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध


टीका टिप्पणी और संदर्भ

दुबे, रमेशचंद्र “खण्ड 7”, हिन्दी विश्वकोश (हिन्दी)। भारतडिस्कवरी पुस्तकालय: नागरी प्रचारिणी सभा वाराणसी, पृष्ठ संख्या- 124।

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=पर्वत&oldid=538869" से लिया गया