गोर  

भारतीय इतिहास से सम्बंध

मुईजुद्दीन ने ग़ज़नी में अपनी सत्ता बढ़ाकर भारत पर आक्रमण करने प्रारंभ कर दिए। उस समय लाहौर में ग़ज़नवियों का अंतिम बादशाह खुसरो मलिक राज्य करता था और मुल्तान करामतियों के अधिकार में था। मुईजुद्दीन ने 1174 ई. में मुल्तान और उसके उपरांत उच्च पर अधिकार कर लिया। उच्च उस समय भट्टी वंश के राजा के अधीन था। 1178 ई. में अन्हिलवाड़ा (गुजरात) के राजा भीमदेव पर आक्रमण कर दिया किंतु सुल्तान को वापस होना पड़ा। 1179 ई. में उसने पेशावर पर अधिकार किया। 1182 ई. में उसने सिंध के समुद्री तट पर स्थित देवल को जीता। 1186 अथवा 1187 ई. में उसने खुसरो मलिक को पराजित कर लाहौर पर कब्जा कर लिया। 1191 ई. में भटिंडा के दृढ़ क़िले पर अधिकार कर उसने पृथ्वीराज चौहान पर चढ़ाई की। तराइन के युद्ध में पृथ्वीराज ने मुईजुद्दीन को बुरी तरह पराजित कर दिया और सुल्तान स्वयं बड़ी कठिनाई से रणक्षेत्र से भाग सका। पृथ्वीराज भटिंडा तक बढ़ता चला गया, किंतु 1192 ई. में सुल्तान ने पुन: पृथ्वीराज पर आक्रमण किया और तराइन के युद्ध में उसे पराजित कर दिया।

सुल्तान ग़ज़नी वापस चला गया। 1193 ई. में उसने कन्नौज पर आक्रमण किया। इटावा के समीप चंदावर में घोर युद्ध हुआ। जयचंद मारा गया। दूसरे वर्ष उसने 'थनकिर' (बयाना) तथा ग्वालियर पर भी अधिकार कर लिया। 1204 ई. में उसने ख्वारिज्म पर पुन: आक्रमण किया, किंतु उसे पराजित होकर ग़ज़नी वापस आना पड़ा। इसी बीच में पंजाब के कबीलों, विशेषकर खोक्खरों ने लाहौर के समीप विद्रोह कर दिया। सुल्तान उन्हें दंड देने के लिये पुन: भारत पहुँचा, किंतु वापस होते समय सिंध नदी पर स्थित 'दमियक' नामक स्थान पर मुलहिदों ने 1206 में उसकी हत्या कर दी। उसकी मृत्यु के उपरांत गोर वंश की भी शक्ति छिन्न-भिन्न हो गई और 1215 ई. में ख्वरिज्मशाहियों ने उनका पूर्णत: अंत कर दिया।[1]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 गोर (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 28 मार्च, 2014।

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