ऑटिज़्म  

ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD)

ऑटिज़्म से प्रभावित व्यक्ति, सीमित और दोहराव युक्त व्यवहार करता है। जैसे- एक ही काम को बार-बार दोहराना। यह सब बच्चे के तीन साल होने से पहले ही शुरू हो जाता है। इन लक्षणों के हल्के (कम प्रभावी) को ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) कहते हैं। जैसे- एस्पर्जर सिंड्रोम तथा इसके गंभीर रूप को ऑटिज़्म (ऑटिस्टिक डिसऑर्डर) कहते हैं। ऑटिज़्म का एक मज़बूत आनुवंशिक आधार होता है, हालांकि ऑटिज़्म की आनुवंशिकी जटिल है और यह स्पष्ट नहीं है कि ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर का कारण बहुजीन संवाद (multigene interactions) है या दुर्लभ उत्परिवर्तन (म्यूटेशन)। ऑटिज़्म से ग्रसित बच्चे आम बच्चों के मुक़ाबले कम संलग्न सुरक्षा का प्रदर्शन करते हैं (जैसे आम बच्चे माता पिता की मौजूदगी में सुरक्षित महसूस करते हैं) यद्यपि यह लक्षण उच्च मस्तिष्क विकास वाले या जिनका ए एस डी कम होता है वाले बच्चों में गायब हो जाता है। ASD से ग्रसित बड़े बच्चे और वयस्क चेहरों और भावनाओं को पहचानने के परीक्षण में बहुत बुरा प्रदर्शन करते हैं। ASD से पीड़ित लोगों के गुस्से और हिंसा के बारे में काफ़ी किस्से हैं लेकिन वैज्ञानिक अध्ययन बहुत कम हैं। यह सीमित आँकडे बताते हैं कि ऑटिज़्म के शिकार मंद बुद्धि बच्चे ही अक्सर आक्रामक या उग्र होते हैं।

एएसडी के प्रकार

ऑटिस्टिक विकार

"क्लासिक" ऑटिज़्म भी कहा जाता है। यह ऑटिज़्म का सबसे सामान्य प्रकार होता है। ऑटिज़्म विकार से पीड़ित रोगी को भाषा में व्यवधान, सामाजिक और संचार में चुनौतियों तथा असामान्य व्यवहार एवं अरुचियां हो सकती है। इस विकार से पीड़ित बहुत सारे व्यक्तियों में बौद्धिक विकलांगता भी हो सकती है।

एस्पर्जर सिन्ड्रोम

एस्पर्जर सिन्ड्रोम से पीड़ित व्यक्ति में ऑटिस्टिक विकार के हल्के लक्षण विकसित होते हैं। उन्हें सामाजिक चुनौतियां और असामान्य व्यवहार तथा अरुचियां भी हो सकती हैं। हालांकि, आमतौर पर यह भाषा या बौद्धिक विकलांगता के साथ होने वाली समस्या नहीं है।

व्यापक विकासात्मक विकार

इस विकार को "असामान्य ऑटिज़्म" कहा जाता है। ऑटिस्टिक विकार या एस्पर्गर सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति के लक्षण अलग-अलग होते हैं, अर्थात् यह लक्षण सभी में एक समान बिल्कुल नहीं होते हैं। पीडीडी-एनओएस के साथ का निदान किया जा सकता है। आमतौर पर पीडीडी-एनओएस से पीड़ित व्यक्तियों में ऑटिस्टिक विकार से पीड़ित व्यक्तियों की तुलना में कम और मध्यम लक्षण प्रकट होते हैं। यह लक्षण केवल सामाजिक और संचार चुनौतियों का कारण बन सकते हैं।

ऑटिज़्म का प्रभाव

वर्ष 2010 तक दुनिया की लगभग 7 करोड़ आबादी ऑटिज़्म से प्रभावित है। विश्व में ऑटिज़्म से प्रभावितों की संख्या एड्स, मधुमेह और कैंसर से पीड़ित रोगियों की मिली-जुली संख्या से भी अधिक होने की सम्भावना है। यहाँ तक कि इससे प्रभावित होने वाले व्यक्तियों की संख्या डाउन सिन्ड्रोम की अपेक्षा अधिक है। विश्व भर में प्रति 10,000 में से 20 व्यक्ति इससे प्रभावित होते हैं और इससे प्रभावित व्यक्तियों में से 80 प्रतिशत मरीज़ पुरुष और मात्र 20 प्रतिशत महिलाएँ हैं। इसका मतलब ऑटिज़्म की समस्या लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में 4 से 5 गुना ज़्यादा है। जिसका अनुपात 1:4.3 है। पुरुषों में ऑटिज़्म अधिक होने का कोई ठोस कारण अब तक सामने नहीं आया है। यह समस्या विश्वभर में सभी वर्गों के लोगों में पाई जाती है। भारत में ऑटिज़्म से ग्रस्त व्यक्तियों की संख्या लगभग 1 करोड़ 70 लाख (तक़रीबन 1.5 मिलियन) है। वर्ष 1980 से अब तक किए गए विभिन्न सर्वेक्षणों के ऑंकड़ों पर नज़र डालें तो ज्ञात होगा कि इस बीच ऑटिज़्म समस्या में आश्चर्यजनक ढंग से बढ़ोत्तरी हुई है। सम्भवत: इसका कारण लोगों में इसके प्रति बढ़ती जागरूकता, डायग्नोसिस के तरीकों में बदलाव तथा सम्बन्धित सेवाओं की सुलभता रही है।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 1.4 अरोरा, श्रीमती राजबाला। ऑटिज़्म: शीघ्र हस्तक्षेप ज़रूरी (हिन्दी) (पी.एच.पी) ग्वालियर टाइम्स। अभिगमन तिथि: 5 दिसंबर, 2010।
  2. जानें क्या है ऑटिज़्म? (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) वेब दुनिया हिन्दी। अभिगमन तिथि: 19 फ़रवरी, 2011
  3. ऑटिज़्म (आत्मविमोह) (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल)। । अभिगमन तिथि: 5 दिसंबर, 2010।
  4. ऑटिज़्म और भ्रांतियाँ (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) वेब दुनिया हिन्दी। अभिगमन तिथि: 19 फ़रवरी, 2011
  5. 5.0 5.1 ऑटिज़्म होने के क्या कारण है? (हिन्दी) (पी.एच.पी) ऑटिज़्म। अभिगमन तिथि: 19 फ़रवरी, 2011

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