उज्जवल सिंह  

राजनीतिक जीवन

उज्जवल सिंह का कांग्रेस या स्वतंत्रता संग्राम से कोई सीधा संपर्क नहीं था, किंतु उसके बावजूद भी वह संवैधानिक तरीकों से देश की स्वतंत्रता का समर्थन करते थे। भारत छोड़ो आंदोलन के समय उन्होंने गृह संसदीय सचिव के पद से त्यागपत्र दे दिया था। 1945 में वे संयुक्त राष्ट्र संघ की एक समिति में भारत के प्रतिनिधि बनकर गए थे। 1946 में वह विधान परिषद और पंजाब विधानसभा के सदस्य भी बने।

वित्तमंत्री तथा राज्यपाल

देश के विभाजन के समय उज्जवल सिंह को अपनी सारी संपत्ति छोड़ कर पाकिस्तान से भारत आना पड़ा। वे पूर्वी पंजाब की राजनीति में सक्रिय भाग लेते रहे और वहां वित्तमंत्री भी बने। केवल सरकार की विभिन्न समितियों में रहने के बाद वे 1 सितम्बर, 1965 से 26 जून, 1966 तक पंजाब के और 28 जून, 1966 से 16 जून, 1967 तक मद्रास के राज्यपाल रहे। उज्जवल सिंह बहुत परिश्रमी, निष्ठावान और विश्वसनीय व्यक्ति थे और सिक्खों के साथ-साथ सर्वसाधारण में उनका सम्मान था।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारतीय चरित कोश |लेखक: लीलाधर शर्मा 'पर्वतीय' |प्रकाशक: शिक्षा भारती, मदरसा रोड, कश्मीरी गेट, दिल्ली |पृष्ठ संख्या: 97-98 |

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