आस्तिकता  

आस्तिकता के पक्ष में युक्तियाँ-पाश्चात्य और भारतीय दर्शन में आस्तिकता को सिद्ध करने में जो अनेक युक्तियां दी जाती हैं उनमें से कुछ ये हैं:

  1. मनुष्यमात्र के मन में ईश्वर का विचार और उसमें विश्वास जन्मजात है। उसका निराकरण कठिन है, अतएव ईश्वर वास्तव में होना चाहिए। इसको आंटोलॉजिकल, अर्थात्‌ प्रत्यय से सत्ता की सिद्धि करनेवाली युक्ति कहते हैं।
  2. संसारगत कार्य-कारण-नियम को जगत्‌ पर लागू करके यह कहा जाता है कि जैसे यहां प्रत्येक कार्य के उपादान और निमित्त कारण होते हैं, उसी प्रकार समस्त जगत्‌ का उपादान और निमित्त कारण भी होना चाहिए और वह ईश्वर है (कास्मोलॉजिकल, अर्थात्‌ सृष्टिकारण युक्ति)।
  3. संसार की सभी क्रियाओं का कोई न कोई प्रयोजन या उद्देश्य होता है और इसकी सब क्रियाएं नियमपूर्वक और संगठित रीति से चल रही हैं। अतएव इसका नियामक, योजक और प्रबंधक कोई मंगलकारी भगवान्‌ होगा (टिलियोलोजिकल, अर्थात्‌ उद्देश्यात्मक युक्ति)।
  4. जिस प्रकार मानव समाज में सब लोगों को नियंत्रण में रखने के लिए और अपराधों का दंड एवं उपकारों और सेवाओं का पुरस्कार देने के लिए राजा अथवा राजव्यवस्था होती है उसी प्रकार समस्त सृष्टि को नियम पर चलाने और पाप पुण्य का फल देनेवाला कोई सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान और न्यायकारी परमात्मा अवश्य है। इसको मॉरल या नैतिक युक्ति कहते हैं।
  5. योगी और भक्त लोग अपने ध्यान और भजन में निमग्न होकर भगवान्‌ का किसी न किसी रूप में दर्शन करके कृतार्थ और तृप्त होते दिखाई पड़ते है (यह युक्ति रहस्यवादी, अर्थात्‌ मिस्टिक युक्ति कहलाती है)।
  6. संसार के सभी धर्मग्रंथों में ईश्वर के अस्तित्व का उपदेश मिलता है, अतएव सर्व-जन-साधारण का और धार्मिक लोगों का ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास है। इस युक्ति को शब्दप्रमाण कहते हैं। नास्तिकों ने इन सब युक्तियों को काटने का प्रयत्न किया है (द्र. 'अनीश्वरवाद')।[2]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिन्दी विश्वकोश, खण्ड 1 |प्रकाशक: नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 474-75 |
  2. सं.ग्रं-वावने: थीज्म; फ्लिंट: थीज्म; फिलासफ़ी ऑव थीज्म; विलियम जेम्स: द विल टु बिलीव; थ्राू नेचर टु गॉड; उदयन: न्यायकुसुमांजलि।

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