अखिलेश यादव  

राजनीतिक परिचय

अखिलेश यादव ने मई 2009 के लोकसभा उप-चुनाव में फ़िरोजाबाद सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी एस.पी.सिंह बघेल (सत्य प्रकाश सिंह बघेल) को 67,301 मतों से हराकर सफलता प्राप्त की। इसके अतिरिक्त वे कन्नौज से भी जीते। बाद में उन्होंने फ़िरोजाबाद सीट से त्यागपत्र दे दिया और कन्नौज सीट अपने पास रखी।

चुनाव क्षेत्र

अखिलेश यादव का चुनाव क्षेत्र कन्नौज, उत्तर प्रदेश है। लोकसभा सदस्य अखिलेश यादव तेरहवीं और पंद्रहवीं लोकसभा के सदस्य रहे हैं।

मुख्यमंत्री के रूप में

विधानसभा चुनाव 2012 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की हार के कारणों में जहां जानकार मुख्यमंत्री रहने के दौरान मायावती की जनता से दूरी गिना रहे हैं, वहीं नए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आम जनता से नजदीकी को अपनी ताकत बना रहे हैं। जनता दरबार लगाने का फैसला, मुख्यमंत्री आवास- 5 कालीदास मार्ग की सड़क आम आदमी के लिए खोलना, लोगों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम करने, जैसे कई कदम हैं जो बताते हैं कि युवा मुख्यमंत्री अखिलेश अपनी सरकार में आम आदमी को केंद्र में रखकर उससे निकटता को अपनी ताकत बनाना चाहते हैं। 2007 में मायावती के मुख्यमंत्री बनते ही कालीदास मार्ग आम जनता के लिए बंद कर दिया गया था। जनता तो दूर सरकारी अधिकारियों तक को उस मार्ग से जाने की पाबंदी थी। अखिलेश ने मुख्यमंत्री बनने के बाद क़रीब एक किलोमीटर लंबे इस रास्ते को आम लोगों के लिए खोलकर स्थानीय जनता को बड़ी राहत दी। मायावती के बारे में कहा जाता है कि मुख्यमंत्री रहते आम जनता तो दूर उनसे बसपा के विधायक व सांसद और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तक नहीं मिल पाते थे। अखिलेश यादव पद संभालने के बाद लगातार लोगों से मिल रहे हैं। सपा की सरकार आने के बाद सूबे में लोकतंत्र बहाल हुआ और आम आदमी को तानाशाह मुख्यमंत्री के कुशासन से मुक्ति मिली है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश ने दहशत पैदा करने वाले पुराने सुरक्षा काफिले में भी कमी कर दी और अपने आवागमन के समय यातायात रोकने की प्रथा भी बंद करा दी। अब मुख्यमंत्री आवास वाली सड़क पर कर्फ्यू जैसे हालात नहीं रहते। उनके कार्यालय के दरवाज़े पहले की तरह आम लोगों के लिए बंद नहीं रहते। मुख्यमंत्री अखिलेश ने विधानसभा के सामने पुराने धरना स्थल को फिर से बहाल कर दिया। साथ ही मायावती के निजी आवास 13-मॉल एवेन्यू में पिछले पांच साल से लगे बैरियर को हटवा दिया। इस मार्ग पर अभी तक आम लोगों की आवाजाही पर पाबंदी थी। जिसके चलते स्थानीय लोगों को कई किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता था। राजनीतिक विश्लेषक एवं लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर रमेश दीक्षित ने कहा कि मायावती की जनता से कथित दूरी के उलट अखिलेश की रणनीति आम लोगों के लिए आसानी से सुलभ मुख्यमंत्री के रूप में खुद को पेश कर जनहित मुख्यमंत्री की छवि बनाने की है।[1]

जनता दरबार

18 अप्रैल 2012 से वह हर बुधवार को जनता दरबार आरम्भ हुआ, जिसमें लोग सीधे मुख्यमंत्री से संवाद कर उन्हें अपनी समस्याएं बता सकते हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण के साथ ही वे सारी जंजीरें तोड़ दी जिनके भार से जनता कराह रही थी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. जनता के क़रीब ही रहेंगे अखिलेश यादव (हिंदी) नया इंडिया डॉट कॉम। अभिगमन तिथि: 4 दिसम्बर, 2012।
  2. सपा के युवराज अखिलेश यादव (हिंदी) वेबदुनिया हिंदी। अभिगमन तिथि: 4 दिसम्बर, 2012।
  3. अखिलेश यादव व्यक्तित्व (हिंदी) उत्तर प्रदेश विधान सभा आधिकारिक वेबसाइट। अभिगमन तिथि: 4 दिसम्बर, 2012।

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