होशियार सिंह  

होशियार सिंह
होशियार सिंह
पूरा नाम होशियार सिंह दहिया
जन्म 5 मई, 1937
जन्म भूमि गाँव सिसाना, सोनीपत, हरियाणा
मृत्यु 6 दिसम्बर, 1998 (आयु- 61 वर्ष)
सेना भारतीय थल सेना
रैंक कर्नल
यूनिट 3 ग्रेनेडियर्स
युद्ध भारत-पाकिस्तान युद्ध (1965), भारत-पाकिस्तान युद्ध (1971)
शिक्षा मेटिकुलेशन
सम्मान परमवीर चक्र
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी 1971 के युद्ध के पहले, होशियार सिंह ने 1965 में भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ लड़ते हुए अपना करिश्मा दिखाया था। बीकानेर सेक्टर में अपने क्षेत्र में आक्रमण पेट्रोलिंग करते हुए उन्होंने ऐसी महत्त्वपूर्ण सूचना लाकर सौंपी थी, जिसके कारण बटालियन की फ़तह आसानी से हो गई थी और इसके लिए उनका उल्लेख 'मैंशंड इस डिस्पैचेज़' में हुआ था।

कर्नल होशियार सिंह (अंग्रेज़ी: Major Hoshiar Singh, जन्म: 5 मई, 1937; मृत्यु: 6 दिसम्बर, 1998) परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय व्यक्ति है। इन्हें यह सम्मान सन 1971 में मिला। वर्ष 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध ने भारत के दो बहादुर सिपाहियों को परमवीर चक्र का हकदार बनाया। एक तो पूना हॉर्स के सेकेण्ड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल जिन्होंने अपने प्राण गँवा कर सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र विजेता का सम्मान प्राप्त किया, दूसरे मेजर होशियार सिंह जिन्होंने 3 ग्रेनेडियर्स की अगुवाई करते हुए अपना अद्भुत पराक्रम दिखाया और दुश्मन को पराजय का मुँह देखना पड़ा। उन्होंने जम्मू कश्मीर की दूसरी ओर, शकरगड़ के पसारी क्षेत्र में जरवाल का मोर्चा फ़तह किया था।

जीवन परिचय

होशियार सिंह का जन्म 5 मई, 1936 को सोनीपत, हरियाणा के एक गाँव सिसाना में हुआ था। उनकी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा स्थानीय हाई स्कूल में तथा उसके बाद जाट सीनियर सेकेण्डरी स्कूल में हुई। वह एक मेधावी छात्र थे। उन्होंने मेटिकुलेशन की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की थी। पढ़ाई के साथ-साथ वह खेल कूद में भी आगे रहते थे। होशियार सिंह पहले राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के लिए बॉलीबाल की पंजाब कंबाइंड टीम के लिए चुने गए और वह टीम फिर राष्ट्रीय टीम चुन ली गई जिसके कैप्टन होशियार सिंह थे। इस टीम का एक मैच जाट रेजिमैटल सेंटर के एक उच्च अधिकारी ने देखा और होशियार सिंह उनकी नजरों में आ गय। इस तरह होशियार सिंह के फौज में आने की भूमिका बनी। 1957 में उन्होंने 2 जाट रेजिमेंट में प्रवेश लिया बाद में वह 3 ग्रेनेडियर्स में कमीशन लेकर अफसर बन गए। 1971 के युद्ध के पहले, होशियार सिंह ने 1965 में भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ लड़ते हुए अपना करिश्मा दिखाया था। बीकानेर सेक्टर में अपने क्षेत्र में आक्रमण पेट्रोलिंग करते हुए उन्होंने ऐसी महत्त्वपूर्ण सूचना लाकर सौंपी थी, जिसके कारण बटालियन की फ़तह आसानी से हो गई थी और इसके लिए उनका उल्लेख 'मैंशंड इस डिस्पैचेज़' में हुआ था। फिर, 1971 का युद्ध तो उनके लिए निर्णायक युद्ध था जिसमें उन्हें देश का सबसे बड़ा सम्मान प्राप्त हुआ।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  • पुस्तक- परमवीर चक्र विजेता | लेखक- अशोक गुप्ता | पृष्ठ संख्या- 106

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