सोनगिरि  

सोनगिरि
सोनगिरि के जैन मन्दिर
विवरण 'सोनगिरि' मध्य प्रदेश में स्थित एक पवित्र तीर्थ स्थान है। यहाँ के मन्दिर जैन धर्म के 'दिगम्बर सम्प्रदाय' के पवित्रतम स्थान है।
राज्य मध्य प्रदेश
ज़िला दतिया
भौगोलिक स्थिति दतिया, मध्य प्रदेश से 15 किलोमीटर की दूरी पर।
प्रसिद्धि हिन्दू तीर्थ स्थान
क्या देखें नारियल कुण्ड, बाजनी शिला
संबंधित लेख मध्य प्रदेश, पीताम्बरा पीठ, दतिया
अन्य जानकारी सोनगिरि में प्राकृतिक रमणीयता से परिपूर्ण पहाड़ पर प्राचीन 77 शिखर युक्त जैन मन्दिर है। तलहटी में आबादी भी है, जिसे 'सनावल' गाँव के नाम से जानते हैं।

सोनगिरि मध्य प्रदेश के दतिया से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। झाँसी-दतिया मुख्य रेलवे लाइन पर स्थित सोनगिरि एक मुख्य तीर्थ स्थान है। यह स्थान और यहाँ के मन्दिर जैन धर्म के 'दिगम्बर सम्प्रदाय' के पवित्रतम स्थान है। इतिहास में सोनगिरि क्षेत्र पर भट्टारकों की चार गट्टियाँ रही थीं, जो ग्वालियर के भट्टारकों की शाखा के रूप में स्थापित हुई थीं। इस तीर्थ स्थल को प्रकृति ने अपनी भरपूर छटा से संवारा, इतिहास ने स्तुत्य गौरव प्रदान किया और अधयात्म ने इसे तपोभूमि बनाकर निर्वाण के कारण सिद्ध क्षेत्र बनाया है।

इतिहास

सोनगिरि का प्राचीन नाम 'श्रमणांचल', 'श्रमणगिरि' और 'स्वर्णगिरि' रहा है। जैन परंपरा के अनुसार सोनगिरि से करोडों साधुओं ने निर्वाण की प्राप्ति की और अष्टम तीर्थंकर चन्द्रप्रभ के समवरण का भी यहाँ अनेक बार आगमन हुआ था।

णंगाणंग कुमारा कोटी पंचद्व मुणिवरे सहिता।
सोनगिरिवरसिहरे णिव्वणगया णमों तेसिं।।

अर्थात "श्रीपुर के महाराजा अरिंजय, मालव देश के महामण्डलिक सम्राट धनंजय और तिलिंग देश के महाबली नरेश अमृत विजय और 1500 अन्य राजा महाराजाओं ने इस तीर्थ से चन्द्रप्रभ भगवान के समवरण में दीक्षा ली थी। महाराज असिंजय के विलक्षण पुत्र नंग और अनंग दोनों राजकुमारों ने उत्तम राजभोग त्यागकर भरी जवानी में चन्द्रप्रभ की देशना से प्रभावित होकर 'जिन' दीक्षा ग्रहण की थी। उज्जैन के महाराज श्रीदत्त इन्हीं मुनिवरों के प्रभाव से 2000 राजाओं के साथ दिगम्बर मुनि हुये थे।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 सिद्धक्षेत्र सोनागिरि (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 03 जुलाई, 2013।

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