सुनीता जैन  

सुनीता जैन
सुनीता जैन
पूरा नाम सुनीता जैन
जन्म 13 जुलाई, 1941
जन्म भूमि अम्बाला, पंजाब
कर्म-क्षेत्र आधुनिक कहानीकार और उपन्यासकार
मुख्य रचनाएँ ‘गान्धर्व पर्व’, ‘दूसरे दिन’, ‘तरु-तरु की डाल पर’, ‘क्षमा’, उठो माधवी, प्रेम में स्त्री आदि
भाषा हिन्दी और अंग्रेज़ी
विद्यालय स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यूयार्क, यूनिवर्सिटी ऑफ़ नेब्रास्का
शिक्षा एम. ए. (अंग्रेज़ी साहित्य), पीएच. डी.
पुरस्कार-उपाधि 'पद्मश्री' के अतिरिक्त 'हरियाणा गौरव', 'साहित्य भूषण', 'साहित्यकार सम्मान', 'महादेवी वर्मा' और 'निराला' नामित सम्मान से सम्मानित हैं।
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी सुनीता जैन 8वें 'विश्व हिन्दी सम्मेलन', न्यूयॉर्क, 2007 में 'विश्व हिन्दी सम्मान' से सम्मानित हिन्दी की पहली कवयित्री हैं।
अद्यतन‎
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

सुनीता जैन (अंग्रेज़ी:Sunita Jain, जन्म- 13 जुलाई, 1941, अम्बाला) हिन्दी और अंग्रेज़ी की आधुनिक कहानीकार और उपन्यासकार हैं। वे एक कवयित्री के रूप में भी प्रसिद्धि प्राप्त कर चुकी हैं। अम्बाला में जन्मी सुनीता जैन ने 'स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यूयार्क' से अंग्रेज़ी साहित्य में एम. ए. किया था। इसके बाद उन्होंने 'यूनिवर्सिटी ऑफ़ नेब्रास्का' से पीएच. डी. की उपाधि प्राप्त की। शिक्षा और साहित्य का 'पद्मश्री' अलंकरण प्राप्त करने वाली सुनीता जैन, अंग्रेज़ी और हिन्दी में बेहतरीन कविताएँ लिखतीं है। उनके उपन्यास, लघुकथाएँ, रचनात्मक अनुवाद और आलोचनात्मक विश्लेषण पाठकों की भरपूर सराहना अर्जित कर चुके हैं। कई पुरस्कारों और फैलोशिप उनके खाते में दर्ज हैं।

लेखन कार्य

सुनीता जैन हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों ही भाषाओं में लेखन कार्य करती हैं। उनकी अब तक 70 से भी अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। 20 कविता संग्रह के अलावा हिन्दी में उनके पाँच उपन्यास एवं चार कहानी संग्रह भी बाज़ार में आ चुके हैं।

सुनीता जैन का साहित्यिक कद बहुत ऊँचा है और अपने बहुवर्णी विस्तार में उनकी काठी सुविस्तृत है। कविता, कहानी, उपन्यास, आत्म-कथा, आलोचना, इन सभी विधाओं में जितने अधिकारपूर्वक उन्होंने निरंतरता में लिखा है, वह विस्मित करता है। उनकी प्रथम कविता वर्ष 1962 में 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' में, प्रथम उपन्यास 1964 में 'बोज्यू' में प्रकाशित हुआ था। 'धर्मयुग' में उनकी पहली कहानी आयी थी। वर्ष 2008, 2009, 2010 और 2011 में उनकी कविताएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई। अक्टूबर, 2009 में 'वर्तमान साहित्य' में 'पांचवां हाथ', 'सरकारी ख़रीद' तथा 'कथा', 'अक्षर पर्व' के फ़रवरी, 2010 अंक में 'आम्रपाली', 'स्त्री सुनती है', 'वापिस उसी किताब में', 'पन्द्रह बर्ष बाद' तथा 'वर्तमान साहित्य' में 'उसने चुना', 'वह लाया' तथा 'जीवन भर की आग' जैसी बेहतरीन कविताएँ हैं।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 सुनीता जैन का रचना संसार (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 23 दिसम्बर, 2012।

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