सर रॉबर्ट बारकर  

सर रॉबर्ट बारकर वारेन हेस्टिंग्स के शासनकाल में ईस्ट इंडिया कम्पनी की सेवा में था और यह बाद में तरक़्क़ी करके प्रधान सेनापति बन गया। उसकी उपस्थिति में 17 जून 1772 ई. को अवध के नवाब शुजाउद्दौला और रुहेलों के नेता हफ़ीज रहमत ख़ाँ के बीच संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इस संधि में यह उल्लिखित था कि यदि मराठे रुहेलखण्ड पर आक्रमण करते हैं तो अवध का नवाब मराठों को निष्कासित कराने में रुहेलों की सहायता करेगा और बदले में रुहेल उसे चालीस लाख रुपया देंगे। रॉबर्ट बारकर संधि पर हस्ताक्षर होने का केवल साक्षी था, क्रियान्वयन के सम्बन्ध में कोई आश्वासन नहीं दिया था। बाद में संधि का उल्लघंन होने पर अंग्रेज़ों को उसे लागू करने के लिए रुहेलखण्ड में अपनी सेना भेजनी पड़ी।


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