सरला ग्रेवाल  

सरला ग्रेवाल
सरला ग्रेवाल
पूरा नाम सरला ग्रेवाल
जन्म 4 अक्टूबर, 1927
मृत्यु 29 जनवरी, 2002
मृत्यु स्थान चण्डीगढ़, पंजाब
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि 'भारतीय प्रशासनिक सेवा' में भारत की दूसरी महिला अधिकारी तथा मध्य प्रदेश की भूतपूर्व राज्यपाल
पद राज्यपाल, मध्य प्रदेश
कार्य काल राज्यपाल- 31 मार्च, 1989 से 5 फ़रवरी, 1990 तक।
शिक्षा दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि
विद्यालय 'पंजाब विश्वविद्यालय
विशेष योगदान सरला ग्रेवाल ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन का सूत्रपात किया। विशेष रूप से महिला साक्षरता कार्यक्रम में उनकी भूमिका सराहनीय रही और नयी शिक्षा नीति का प्रारूप तैयार करने में उन्होंने महत्त्वपूर्ण कार्य किया।
अन्य जानकारी 10 अगस्त, 1981 को सरला ग्रेवाल 'समाज कल्याण मंत्रालय' की सचिव बनीं। अपने कार्यकाल में उन्होंने समाज कल्याण की विभिन्न नीतियों और योजनाओं को नयी दिशा दी और उनमें बेहतर समन्वय स्थापित किया।

सरला ग्रेवाल (अंग्रेज़ी: Sarla Grewal ; जन्म- 4 अक्टूबर, 1927; मृत्यु- 29 जनवरी, 2002, चण्डीगढ़, पंजाब) 'भारतीय प्रशासनिक सेवा' में भारत की दूसरी महिला अधिकारी थीं। उन्होंने पंजाब के अन्तर्गत अनेक महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्य किया था। सरला ग्रेवाल 1956 में शिमला की डिप्टी कमिश्नर बनाई गई थीं। वे देश में इस पद पर दायित्व निभाने वाली पहली महिला अधिकारी थीं। 1963 में वे पंजाब सरकार के स्वास्थ्य विभाग की सचिव नियुक्त हुई थीं। उन्होंने पंजाब के विकास आयुक्त के रूप में 1971 से 1974 तीन वर्षों तक इस पद की जिम्मेदारी का निर्वहन किया था। इसके अन्तर्गत कृषि और उससे संबंधित विभागों का दायित्व शामिल था। सरला ग्रेवाल मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद पर भी रहीं। इस पद पर उन्होंने 31 मार्च, 1989 से 5 फ़रवरी, 1990 तक कार्य किया।[1]

जन्म तथा शिक्षा

सरला ग्रेवाल का जन्म 4 अक्टूबर, 1927 को हुआ था। अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने आनर्स में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। बाद में सरला ग्रेवाल ने दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि 'पंजाब विश्वविद्यालय' से प्राप्त की। यहाँ पंजाब विश्वविद्यालय में उन्होंने सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया था।

प्रशासनिक पद की पाप्ति

वर्ष 1952 में सरला ग्रेवाल ने 'भारतीय प्रशासनिक सेवा' में प्रवेश किया। वे उस समय इस सेवा में आने वाली भारत की दूसरी महिला अधिकारी थीं। उन्होंने पंजाब के अन्तर्गत अनेक महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्य किया। 1956 में वे शिमला की डिप्टी कमिश्नर बनाई गई और देश में इस पद का दायित्व निभाने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं। सरला ग्रेवाल 1962 में शिक्षा संचालक बनने वाली पहली आई.ए.एस. अधिकारी थीं। इस हैसियत से उन्होंने प्राथमिक से लेकर हाईस्कूल और विश्वविद्यालय स्तर तक शिक्षा प्रशासन के विभिन्न दायित्वों का निर्वाह किया।[2]

विदेश यात्रा

इसी दौरान राज्य में युवक कार्यक्रमों और प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रमों को उन्होंने शिक्षा प्रणाली के माध्यमिक स्तर पर व्यवसाय से जोड़ने की पहल की। वे बाद में रूस में माध्यमिक शिक्षा प्रणाली का अध्ययन करने गयीं। ब्रिटिश कौंसिल की छात्रवृत्ति पर दस महीने तक 'लन्दन स्कूल ऑफ इकनामिक्स' में विकासशील देशों में सामाजिक सेवाओं के स्वरूप का भी उन्होंने गहन अध्ययन किया। इस शिक्षा पाठयक्रम में स्वास्थ्य शिक्षा और समाज कल्याण सेवाओं की महत्ता पर बहुत जोर दिया गया था।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. Former Governors of Madhya Pradesh (हिन्दी) Raj Bhavan, Bhopal। अभिगमन तिथि: 19 सितम्बर, 2014।
  2. 2.0 2.1 2.2 2.3 मध्य प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल (हिन्दी) एमपी पोस्ट। अभिगमन तिथि: 19 सितम्बर, 2014।

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