सम विश्वविद्यालय  

विश्वविद्यालय से भिन्न उच्च शिक्षा संस्था को, जो किसी विशिष्ट क्षेत्र में बहुत ऊंचे स्तर का कार्य कर रही हो सम विश्वविद्यालय संस्था घोषित किया जा सकता है। ऐसी संस्थाएं जिन्हें सम विश्वविद्यालय का स्तर प्राप्त है, को किसी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक स्थिति और विशेषाधिकार प्राप्त हैं। इन सम-विश्वविद्यालय समझी जाने वाली संस्थाओं ने देश में उच्चतर शिक्षा के आधार को फैलाया है और चिकित्सा शिक्षा, शारीरिक शिक्षा, मत्स्य शिक्षा, भाषा, सामाजिक विज्ञान, जनसंख्या विज्ञान, दुग्ध अनुसंधान, वन अनुसंधान, शस्त्र प्रौद्योगिकी, समुद्री शिक्षा, योग, संगीत और सूचना प्रौद्योगिकी इत्यादि जैसे विभिन्न विषयों में शिक्षा और अनुसंधान सुविधाएं प्रदान कर रही हैं।

  • विभाग विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 की धारा 3 के अंतर्गत सम-विश्वविद्यालय का स्तर प्रदान करने के लिए आवेदनों पर कार्रवाई करने में ज़िम्मेदार और निष्पक्षता निर्धारित करता है। इसलिए विभाग ने ऐसे आवेदनों की स्थिति के संबंध में सूचना इसकी वेबसाइट पर समय-समय पर स्थिति की समीक्षा दर्शायी जाती हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग सार्वजनिक क्षेत्र में भी सभी सूचना दर्शाता है।
  • उच्च शिक्षा के ये प्रसिद्ध संस्थान विश्वविद्यालय नहीं होते, लेकिन अपने अच्छे 'शिक्षण रेकॉर्ड' के कारण इन्हें 'यूनिवर्सिटी' का दर्ज़ा दे दिया जाता है। डीम्ड यूनिवर्सिटी का स्टेटस मिल जाने के बाद इन संस्थानों को पूरी स्वायत्तता मिल जाती है। ये न सिर्फ अपना कोर्स और सिलेबस खुद डिज़ाइन कर सकते हैं, बल्कि अपने प्रवेश और फीस संबंधी नियम भी बना सकते हैं। इस समय लगभग सौ डीम्ड यूनिवर्सिटी हैं, जिनमें प्रमुख हैं - नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ टेक्नॉलजी, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु आदि।[1]



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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. कितनी तरह की यूनिवर्सिटीज (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 15 जून, 2011।

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