संगीत नाटक अकादमी  

संगीत नाटक अकादमी
'संगीत नाटक अकादमी' का प्रतीक चिह्न
विवरण 'संगीत नाटक अकादमी' एक राष्ट्रीय अकादमी है। अकादमी अपनी स्थापना के बाद से ही भारत में संगीत, नृत्य और नाटक के उन्नयन में सहायता के लिए एकीकृत ढांचा क़ायम करने में जुटी है।
राज्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली
स्थापना 31 मई, 1952
मार्ग स्थिति रविन्द्र भवन, फिरोज़शाह रोड, नई दिल्ली
संबद्ध वर्तमान में 'संगीत नाटक अकादमी' भारत सरकार के 'पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय' के अंतर्गत एक स्वायत संस्था है।
उद्देश्य देश-विदेश में भारतीय संगीत, नाटक और नृत्य कलाओं को प्रोत्साहन देना और उनका समग्र विकास और उन्नति करना।
विशेष अकादमी की संगीत वाद्ययत्रों की वीधि में 600 से अधिक वाद्ययंत्र रखे हैं और इन वाद्ययंत्रों में बड़ी मात्रा में प्रकाशित सामग्री का भी यह स्रोत रही है।
अन्य जानकारी अकादमी द्वारा प्रस्तुत अथवा प्रायोजित संगीत, नृत्य एवं नाटक समारोह समूचे देश में आयोजित किए जाते हैं। विभिन्न कला-विधाऔं के महान् कलाकारों को अकादमी का अध्येता चुनकर सम्मानित किया गया है।


संगीत नाटक अकादमी संगीत, नृत्य और नाटक की राष्ट्रीय अकादमी है, जो रविन्द्र भवन, फिरोज़शाह रोड, नई दिल्ली में स्थित है। इसे आधुनिक भारत की निर्माण प्रक्रिया में प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में याद किया जा सकता है, जिससे भारत को 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। कलाओं के क्षणिक गुण-स्वभाव तथा उनके संरक्षण की आवश्यकता को देखते हुए इन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस प्रकार समाहित हो जाना चाहिए कि सामान्य व्यक्ति को इन्हें सीखने, अभ्यास करने और बढ़ाने का अवसर प्राप्त हो सके। बीसवीं सदी के शुरू के कुछ दशकों में ही कलाओं के संरक्षण और विकास का दायित्व सरकार का समझा जाने लगा था। अकादमी का मुख्यालय दिल्ली में स्थित है।

देश-विदेश में भारतीय संगीत के प्रचार-प्रसार तथा नृत्य, नाटक एवं संगीत के विकास के उदेश्य से भारत सरकार ने संगीत नाटक अकादमी की स्थापना की। अपनी समन्वयकारी एवं विकासशील गतिविधियों के अंग के रूप में यह प्रतियोगिताएं, गोष्ठियां तथा संगीत सम्मेलनों का आयोजन करती है और श्रेष्ठ कलाकारों को अनुदान भी देती है तथा पारम्पारिक शिक्षकों को वित्तीय सहायता तथा विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियां प्रदान करती है।

पारित प्रस्ताव

इस आशय की पहली व्यापक सार्वजनिक अपील 1945 में सरकार से की गई जब बंगाल की एशियाटिक सोसायटी ने प्रस्ताव प्रस्तुत किया कि एक राष्ट्रीय संस्कृति न्यास (नेशलन कल्चरल ट्रस्ट) बनाया जाए जिससे निम्न् तीन अकादमियां सम्मिलित हों।–

  1. नृत्य, नाटक एवं संगीत अकादमी
  2. साहित्य अकादमी और
  3. कला एवं वास्तुकला अकादमी

इस समूचे मुद्दे पर स्वतंत्रता के पश्चात् कोलकाता में 1949 में आयोजित कला सम्मेलन में तथा नई दिल्ली में 1951 में आयोजित साहित्य सम्मेलन तथा नृत्य, नाटकसंगीत सम्मेलन में फिर से विचार किया गया। भारत सरकार द्वारा आयोजित इन सम्मेलनों में अंततः तीन राष्ट्रीय अकादमियां स्थापित करने की सिफारिश की गई। इनमें से एक अकादमी नृत्य, नाटक और संगीत के लिए, एक साहित्य के लिए और एक कला के लिए स्थापित किए जाने का प्रस्ताव किया गया।

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