शाह नवाज़ ख़ाँ का मक़बरा  

शाह नवाज़ ख़ाँ का मक़बरा, बुरहानपुर

शाह नवाज़ ख़ाँ का मक़बरा, बुरहानपुर के उत्तर में 2 किमी. के फासले पर उतावली नदी के किनारे काले पत्थर से निर्मित मुग़ल शासन काल का एक दर्शनीय भव्य मक़बरा है। बुरहानपुर में मुग़ल काल में निर्मित अन्य इमारतों में से इस इमारत का अपना विशेष स्थान है। शाह नवाज़ ख़ाँ का असली नाम 'इरज' था। इसका जन्म अहमदाबाद (गुजरात) में हुआ था। यह बुरहानपुर के सूबेदार अब्दुल रहीम ख़ानख़ाना का ज्येष्ठ पुत्र था। यह मक़बरा इतने वर्ष बीत जाने के पश्चात् भी अच्छी स्थिति में है। यह स्थान शहरवासियों के लिए सर्वोत्तम पर्यटन स्थल माना जाता है।[1]

शराब की लत व मृत्यु

इसी वीर योद्धा और कुशल सेना नायक की वीरता और युद्ध कौशल से जहाँगीर को दक्षिण की लड़ाइरयों में विजयी मिली थीं। जहाँगीर ने सन् 1021 हिजरी में इनहें 'शाह नवाज़' की उपाधि से अलंकृत किया था। साथ ही उसे पाँच हज़ारी मनसबदारों का गोरवशाली पद प्रदान किया था। सेना में यह पद महतवपूर्ण माना जाता था। शाह नवाज़ की बहिन सम्राट अकबर के पुत्र शहज़ादा दानियाल को ब्याही गई थी। शाह नवाज़ ख़ाँ को शराब पीने की बुरी लत थी, जिससे उसका स्वास्थ्य ख़राब होने लगा था। जहाँगीरने अब्दुल रहीम ख़ानख़ाना को पाबंद किया था, कि वे शाह नवाज़ को इस बुरी लत से दूर रखें, किंतु सारी कोशिशें विफल रहीं और सन् 1028 हिजरी को युवा अवस्था मे ही शाह नवाज़ ख़ाँ का देहावसान हो गया। उस समय वे 44 वर्ष के थे। उनके देहांत से जहाँगीर को गहरा आघात पहुँचा। उसने रहीम ख़ानख़ाना को भी सांत्वना दी।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 शाह नवाज खाँ का मक़बरा (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 19 जून, 2011।

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