शत्रुंजय पहाड़ी  

केसव जी नोजाक मंदिर, शत्रुंजय

शत्रुंजय पहाड़ी गुजरात के ऐतिहासिक नगर पालीताना के निकट पाँच पहाड़ियों में सबसे अधिक पवित्र पहाड़ी, जिस पर जैनों के प्रख्यात मन्दिर स्थित हैं। जैन ग्रन्थ 'विविध तीर्थकल्प' में शत्रुंजय के निम्न नाम दिए गए हैं–सिद्धिक्षेत्र, तीर्थराज, मरुदेव, भगीरथ, विमलाद्रि, महस्रपत्र, सहस्रकाल, तालभज, कदम्ब, शतपत्र, नगाधिराजध, अष्टोत्तरशतकूट, सहस्रपत्र, धणिक, लौहित्य, कपर्दिनिवास, सिद्धिशेखर, मुक्तिनिलय, सिद्धिपर्वत, पुंडरीक।

मन्दिर

शत्रुंजय के पाँच शिखर (कूट) बताए गए हैं। ऋषभसेन और 24 जैन तीर्थकरों में से 23 (नेमिश्कर को छोड़कर) इस पर्वत पर आए थे। महाराजा बाहुबली ने यहाँ पर मरुदेव के मन्दिर का निर्माण कराया था। इस स्थान पर पार्श्व और महावीर के मन्दिर स्थित थे। नीचे नेमीदेव का विशाल मन्दिर था। युगादिश के मन्दिर का जीर्णोद्वार मंत्रीश्वर बाणभट्ट ने किया था।
तीर्थंकर पार्श्वनाथ की संगमरमर की मूर्ति, शत्रुंजय
श्रेष्ठी जावड़ि ने पुंडरीक और कपर्दी की मूर्तियाँ यहाँ पर जैन चैत्य में प्रतिष्ठापित करके पुण्य प्राप्त किया था। अजित चैत्य के निकट अनुपम सरोवर स्थित था। मरुदेवी के निकट महात्मा शान्ति का चैत्य था, जिसके निकट सोने–चाँदी की खानें थीं। यहाँ पर वास्तुपाल नामक मंत्री ने आदि अर्हत ऋषभदेव और पुंडरीक की मूर्तियाँ स्थापित की थीं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  • ऐतिहासिक स्थानावली से पेज संख्या 889-890 | विजयेन्द्र कुमार माथुर | वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग | मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार

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