शक साम्राज्य  

शक राज पुरुष
Saka King (Mastan)
राजकीय संग्रहालय, मथुरा

शकों का भारत में प्रवेश

मगध के विशाल साम्राज्य की शक्ति के क्षीण होने पर जिन विदेशी आक्रान्ताओं के आक्रमण भारत पर शुरू हुए, उनमें से डेमेट्रियस और मीनान्डर सदृश यवन विजेताओं ने भारत के उत्तर-पश्चिमी प्रदेशों में अपने अनेक राज्य स्थापित किए, और उनके वंशधरों ने उनका शासन किया। पर इस युग में (दूसरी सदी ई. पू. और उसके बाद) यवनों (बैक्ट्रिया के ग्रीक) के अतिरिक्त पार्थियन और शक लोगों ने भी इस देश पर अनेक आक्रमण किए। विशाल सीरियन साम्राज्य की अधीनता से मुक्त होकर जिन राज्यों ने अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित की थी, उनमें से एक बैक्ट्रिया था और दूसरा पार्थिया। पार्थिया राज्य में वह देश अंतर्गत था, जिसे अब ईरान कहा जाता है।

शक जाति

बैक्ट्रिया के यवन राज्य का अन्त शक जाति के आक्रमण द्वारा हुआ था। इन शक लोगों का मूल निवास स्थान सीर नदी की घाटी में था। दूसरी सदी ई. पू. में उन पर उत्तर-पूर्व की ओर से 'युइशि जाति' ने आक्रमण किया। युइशि लोग तिब्बत के उत्तर-पश्चिम में तकला-मकान की मरुभूमि के सीमान्त पर निवास करते थे। ये बड़े ही वीर और योद्धा थे। हूणों के आक्रमण के कारण ये अपने प्राचीन अभिजन को छोड़कर आगे बढ़ जाने के लिए विवश हुए थे। प्राचीन काल में हूण जाति उत्तरी चीन में निवास करती थी, और चीन के सभ्य राज्यों पर आक्रमण करती रहती थी। उन्हीं के हमलों से अपने देश की रक्षा करने के लिए चीन के शक्तिशाली सम्राट शी-हुआँग-ती (246-210 ई. पू.) ने उस विशाल दीवार का निर्माण कराया था, जो अब तक भी उत्तरी चीन में विद्यमान है। इस दीवार के कारण हूण लोगों के लिए चीन पर आक्रमण करना सम्भव नहीं रहा, और उन्होंने पश्चिम की ओर बढ़ना शुरू किया। हूण लोग असभ्य और बर्बर थे, और लूट-मार के द्वारा ही अपना निर्वाह करते थे। हूणों ने प्रचण्ड आँधी के समान पश्चिम की ओर बढ़ना शुरू किया, और युइशि लोगों को जीत लिया। उनकी राजा की युद्ध क्षेत्र में मृत्यु हुई। विधवा रानी के नेतृत्व में युइशि लोग अपने प्राचीन अभिजन को छोड़कर आगे बढ़ने के लिए विवश हो गए। सीर नदी की घाटी में उस समय शकों का निवास था। युइशि जाति ने उन पर हमला कर दिया, और शक उनसे परास्त हो गए। विवश होकर शकों को अपना प्रदेश छोड़ना पड़ा, और उनके विविध जन (क़बीले) विविध में आगे बढ़े। हूणों ने युइशियों को धकेला, और युइशियों ने शकों को। हूणों की बाढ़ ने युइशि जाति के प्रदेश को आक्रांत कर दिया, और शकों के प्रदेश पर युइशि छा गए। यही समय था, जब शकों की एक शाखा ने बैक्ट्रिया पर आक्रमण किया और वहाँ के यवन राजा हेलिओक्लीज़ को परास्त किया। शक लोगों की जिस शाखा ने बैक्ट्रिया की विजय की थी, वह हिन्दुकुश पर्वत को पार कर भारत में प्रविष्ट नहीं हुई। इसीलिए हेलिओक्लीज़ का शासन उत्तर-पश्चिमी भारत में क़ायम रहा।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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