विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस  

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस
विवरण 'विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस' पूरे विश्व में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर जागरूकता पैदा करने के लिए प्रतिवर्ष मनाया जाता है। इस वर्ष इस दिवस का विषय "कार्यस्थल में मानसिक स्वास्थ्य" रखा गया है।
उद्देश्य दुनिया भर में लोगों को मानसिक बीमारी के प्रति जागरूक करना और जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार को स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण के लिए प्रेरित करना।
शुरुआत 1982
तिथि 10 अक्टूबर
संबंधित लेख विश्व स्वास्थ्य दिवस
अन्य जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मानसिक विकारों से पीड़ित व्यक्तियों की अनुमानित संख्या 450 मिलियन है। भारत में लगभग 1.5 मिलियन व्यक्ति, जिनमें बच्चे एवं किशोर भी शामिल है, गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित हैं।
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (अंग्रेज़ी: World Mental Health Day) पूरे विश्व में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर जागरूकता पैदा करने के लिए प्रतिवर्ष 10 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का विषय "कार्यस्थल में मानसिक स्वास्थ्य" रखा गया है। इसके अनुसार मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा में सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक दोनों सहयोगों को शामिल किया गया है। जैसे कि सामान्य स्वास्थ्य देखभाल कभी भी अकेले शारीरिक प्राथमिक उपचार के नहीं होती है, वैसे ही मानसिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली अकेले मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार के नहीं होती है। निस्संदेह, मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा के क्षेत्र में निवेश लंबी अवधि के प्रयास का हिस्सा है जो कि यह सुनिश्चित करता है कि संकट के कारण कोई भी गंभीर समस्या से पीड़ित व्यक्ति बुनियादी सहयोग प्राप्त करने में सक्षम होगा तथा जिन लोगों को मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा से ज़्यादा सेवाओं की आवश्यकता होगी, उन्हें अतिरिक्त उन्नत सहयोग स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य एवं सामाजिक सेवाओं से प्राप्त होगा।[1]

क्या है मानसिक बीमारी

मानसिक स्वास्थ्य विकार विश्व भर में होने वाली सामान्य बीमारियों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मानसिक विकारों से पीड़ित व्यक्तियों की अनुमानित संख्या 450 मिलियन है। भारत में लगभग 1.5 मिलियन व्यक्ति जिनमें बच्चे एवं किशोर भी शामिल है, गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित हैं। मानसिक बीमारी व्यक्ति के महसूस, सोचने एवं काम करने के तरीके को प्रभावित करती है। यह रोग व्यक्ति के मनोयोग, स्वभाव, ध्यान और संयोजन एवं बातचीत करने की क्षमता में समस्या पैदा करता है। अंततः व्यक्ति असामान्य व्यवहार का शिकार हो जाता है। उसे दैनिक जीवन के कार्यकलापों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता हैं, जिसके कारण यह गंभीर समस्या स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गयी है। इसलिए भारत सरकार ने देश में मानसिक बीमारी के बढ़ते बोझ पर विचार करने के उद्देश्य से वर्ष 1982 में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनएमएचपी) की शुरूआत की थी।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (हिन्दी) hi.nhp.gov.in। अभिगमन तिथि: 14 अक्टूबर, 2016।

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