विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस  

विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस
विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस
विवरण 'विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस' 19 अगस्त को मनाया जाता है। फ़ोटोग्राफ़ी के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने घर, परिवार, रिश्तेदार और कभी न भूल सकने वाले पलों की तस्वीरें लेकर उन्हें सहेज सकता है।
तिथि 19 अगस्त
योगदान उपभोक्तावाद आज के समय में अपनी चरम सीमा पर है, ऐसे में ग्राहक को उत्पादन की ओर खींचने में फ़ोटोग्राफ़ी का भी बहुत बड़ा योगदान है।
अन्य जानकारी सन 1834 में टेल बॉट ने लाइट सेंसेटिव काग़ज़ का आविष्कार किया, जिससे खींचे चित्र को स्थायी रूप में रखने की सुविधा प्राप्त हुई।
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विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस (अंग्रेज़ी: World Photography Day) प्रत्येक वर्ष 19 अगस्त को मनाया जाता है। संसार में प्रकृति ने प्रत्येक प्राणी को जन्म के साथ एक कैमरा दिया है, जिससे वह संसार की प्रत्येक वस्तु की छवि अपने दिमाग में अंकित करता है। वह कैमरा है उसकी 'आँख'। इस दृष्टि से देखा जाए तो प्रत्येक प्राणी एक फ़ोटोग्राफ़र है। वैज्ञानिक तरक्की के साथ-साथ मनुष्य ने अपने साधन बढ़ाना प्रारंभ किये और अनेक आविष्कारों के साथ ही साथ कृत्रिम लैंस का भी आविष्कार हुआ। समय के साथ आगे बढ़ते हुए उसने इस लैंस से प्राप्त छवि को स्थायी रूप से सहेजने का प्रयास किया। इसी प्रयास की सफलता वाले दिन को अब "विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस" के रूप में मनाया जाता है।

शुरुआत

सर्वप्रथम 1839 में फ़्राँस के वैज्ञानिक लुईस जेकस तथा मेंडे डाग्युरे ने फ़ोटो तत्व को खोजने का दावा किया था। ब्रिटिश वैज्ञानिक विलियम हेनरी फॉक्सटेल बोट ने नेगेटिव-पॉजीटिव प्रोसेस ढूँढ लिया था। सन 1834 में टेल बॉट ने लाइट सेंसेटिव काग़ज़ का आविष्कार किया, जिससे खींचे चित्र को स्थायी रूप में रखने की सुविधा प्राप्त हुई। फ़्राँसीसी वैज्ञानिक आर्गो ने 7 जनवरी, 1839 को फ्रेंच अकादमी ऑफ़ साइंस के लिए एक रिपोर्ट तैयार की। फ़्राँस सरकार ने यह प्रोसेस रिपोर्ट ख़रीदकर उसे आम लोगों के लिए 19 अगस्त, 1939 को मुफ़्त घोषित किया। यही कारण है कि 19 अगस्त को विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस मनाया जाता है।[1] फ़ोटोग्राफ़ी के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने घर, परिवार, रिश्तेदार और कभी न भूल सकने वाले पलों की तस्वीरें लेकर उन्हें सहेज सकता है।

फ़ोटोग्राफ़ी का योगदान

फ़ोटोग्राफ़ी का आविष्कार जहाँ संसार को एक-दूसरे के क़रीब लाया, वहीं एक-दूसरे को जानने, उनकी संस्कृति को समझने तथा इतिहास को समृद्ध बनाने में भी उसने बहुत बड़ी मदद की है। आज संसार के किसी दूरस्थ कोने में स्थित द्वीप के जनजीवन की सचित्र जानकारी बड़ी आसानी से प्राप्त होती है, तो इसमें फ़ोटोग्राफ़ी के योगदान को कम नहीं किया जा सकता। वैज्ञानिक तथा तकनीकी सफलता के साथ-साथ फ़ोटोग्राफ़ी ने भी आज बहुत तरक्की की है। आज व्यक्ति के पास ऐसे साधन मौजूद हैं, जिसमें सिर्फ बटन दबाने की देर है और मिनटों में अच्छी से अच्छी तस्वीर उसके हाथों में होती है। किंतु सिर्फ अच्छे साधन ही अच्छी तस्वीर प्राप्त करने की ग्यारंटी दे सकते, तो फिर मानव दिमाग का उपयोग क्यों करता? तकनीक चाहे जैसी तरक्की करे, उसके पीछे कहीं न कहीं दिमाग ही काम करता है। यही फ़र्क़ मानव को अन्य प्राणियों में श्रेष्ठ बनाता है। फ़ोटोग्राफ़ी में भी अच्छा दिमाग ही अच्छी तस्वीर प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 19 अगस्त, 2013।

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