वामदेव  

Disamb2.jpg वामदेव एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- वामदेव (बहुविकल्पी)

वामदेव गौतम ऋषि के पुत्र थे तथा वामदेव को गौतम भी कहा जाता है।

जन्म

वामदेव जब माँ के गर्भ में थे तभी से उन्हें अपने पूर्वजन्म आदि का ज्ञान हो गया था। उन्होंने सोचा, माँ की योनि से तो सभी जन्म लेते हैं और यह कष्टकर है, अत: माँ का पेट फाड़ कर बाहर निकलना चाहिए। वामदेव की माँ को इसका आभास हो गया। अत: उसने अपने जीवन को संकट में पड़ा जानकर देवी अदिति से रक्षा की कामना की। अदिति और इंद्र ने प्रकट होकर गर्भ में स्थित वामदेव को बहुत समझाया, किंतु वामदेव नहीं माने और वामदेव ने इंद्र से कहा, "इंद्र! मैं जानता हूँ कि पूर्वजन्म में मैं ही मनु तथा सूर्य रहा हूँ। मैं ही ऋषि कक्षीवत (कक्षीवान) था। कवि उशना भी मैं ही था। मैं जन्मत्रयी को भी जानता हूँ। वामदेव कहने लगे जीव का प्रथम जन्म तब होता है, जब पिता के शुक कीट माँ के शोणिक द्रव्य से मिलते है। दूसरा जन्म योनि से बाहर निकलकर है, और तीसरा जन्म मृत्युपरांत पुनर्जन्म है। यही प्राणी का अमरत्व भी है।" वामदेव ने इंद्र को अपने समस्त ज्ञान का परिचय देकर योग से श्येन पक्षी का रुप धारण किया तथा अपनी माता के उदय से बाहर निकल आये।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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