लक्ष्मीचंद जैन  

लक्ष्मीचंद जैन
लक्ष्मीचंद जैन
पूरा नाम लक्ष्मीचंद जैन
जन्म 13 दिसम्बर, 1925
जन्म भूमि दिल्ली
मृत्यु 14 नवम्बर, 2010
अभिभावक पिता- फूलचंद जैन, माता- चमेली देवी
कर्म भूमि भारत
शिक्षा परास्नातक
विद्यालय दिल्ली यूनिवर्सिटी
पुरस्कार-उपाधि मैग्सेसे पुरस्कार (1989)
प्रसिद्धि अर्थशास्त्री
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी भारत में एशिया रिलेशंस कांफ्रेंस का आयोजन हुआ, जिसमें लक्ष्मीचंद जैन ने सक्रिय व्यवस्थात्मक भूमिका निभाई और उनको बहुत से नेताओं से मिलने तथा सुनने का मौका मिला। इन्होंने 1948 में कमला देवी के साथ एक इण्डियन को-ऑपरेटिव यूनियन की स्थापना की।
अद्यतन‎

लक्ष्मीचंद जैन (अंग्रेज़ी: Lakshmi Chand Jain, जन्म: 13 दिसम्बर, 1925; मृत्यु:14 नवम्बर, 2010) भारत के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री थे। इनके माता-पिता दोनों सक्रिय स्वतंत्रता सेनानी थे, जिसका प्रभाव इन पर भी पड़ा था। राष्ट्रीय भावनाओं की बुनियाद को लेकर लक्ष्मीचंद जैन की कुछ स्मृतियाँ तथा संस्मरण बेहद रोचक हैं। 1947 के अन्तिम दिनों में उनकी भेंट एक कैम्प में कमला देवी चट्टोपाध्याय से हुई थी। इसके बाद सन 1948 में जैन ने कमला देवी के साथ एक 'इण्डियन को-ऑपरेटिव यूनियन' की स्थापना की। सन 1968 में उन्होंने एक कंसल्टिंग फर्म भी खड़ी की, जो किसानों तथा कारीगरों की सलाह पर सरकारी तथा गैर सरकारी कामकाज में मदद करती थी। इस तरह से लक्ष्मीचंद जैन ने किसानों, कारीगरों, तथा स्त्रियों के समूह तथा सरकारी कमेटियों और बोर्ड के बीच एक सेतु की भूमिका अदा की थी, जिसका लाभ उन्हें मिला।[1]

जन्म तथा शिक्षा

लक्ष्मीचंद जैन का जन्म 13 दिसम्बर 1925 को दिल्ली में हुआ था। वह अपने पिता की चार संतानों में सबसे बड़े थे। उनके पिता 'फूलचंद जैन' तथा माँ 'चमेली देवी' दोनों ही सक्रिय स्वतंत्रता सेनानी थे तथा उन्हीं की जरिये लक्ष्मीचंद जैन ने भी यह संस्कार पाया था। राष्ट्रीय भावनाओं की बुनियाद को लेकर उनकी कुछ स्मृतियाँ तथा संस्मरण रोचक हैं। एक बार बेहद किटकिटाती सर्दी में एकदम सुबह लक्ष्मीचंद के पिता उन्हें गाँधी जी की जनसभा में ले गए। इस पर गाँधी जी ने उनके पिता को डाँट लगाई कि वह ऐसे मौसम में छोटे बालक को क्यों लेकर आए.... उनके बाद लक्ष्मीचंद को गाँधी जी ने स्वयं शाल औढ़ाया और मेवे खाने को दिए। इसी तरह एक बार लक्ष्मीचंद पण्डित नेहरू का भाषण सुनने ले जाए गए और भीड़ में गुम हो गए। पण्डित नेहरू ने स्वयं उन्हें खोजकर गोद में उठाया और उनके पिता को सौंपा।

लक्ष्मीचंद जैन की शिक्षा 1929 में शुरु हुई। उन्होंने जैन संस्थापित प्राइमरी तथा सेकेंडरी स्कूलों में, दिल्ली में ही पढ़ाई की। वह एक प्रतिशाली छात्र थे तथा क्लास के हेडब्वॉवॉय बनाए गए थे। 1939 में लक्षीचंद ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज में प्रवेश लिया। शुरू में उन्होंने मेडिकल विषयों से पढ़ाई शुरू की लेकिन दो साल बाद वह इतिहास तथा दर्शनशास्त्र पढ़ने लगे। व्यावहारिक अर्थशास्त्र पर इनकी जबरदस्त पकड़ थी, जिसका उन्होंने जीवन में बहुत उपयोग किया। इस विषय पर उन्होंने 1955 में हावर्ड यूनिवर्सिटी से एक ग्रीष्म कालानी पाठ्यक्रम भी लिया। इसके अलावा उनकी बहुत सी अनौपचारिक शिक्षा उनकी ऑक्सफोर्ड से पढ़ी पत्नी 'देवकी' के जरिये हुई। लक्ष्मीचंद की यूनिवर्सिटी की पढ़ाई बहुत से कारणों से अधबीच में छूट गई। उसमें मुख्य कारण दूसरे विश्वयुद्ध का छिड़ जाना था।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 मैग्सेसे पुरस्कार विजेता भारतीय |अनुवादक: अशोक गुप्ता |प्रकाशक: नया साहित्य, 1590, मदरसा, रोड, कशमीरी गेट दिल्ली-110006 |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 93-96 |

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