राम चतुर मल्लिक  

राम चतुर मल्लिक
राम चतुर मल्लिक
पूरा नाम पंडित राम चतुर मल्लिक
जन्म 5 अक्टूबर, 1902
जन्म भूमि दरभंगा ज़िला, बिहार
मृत्यु 11 जनवरी, 1990
अभिभावक पंडित राजित राम
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र 'भारतीय शास्त्रीय संगीत'
पुरस्कार-उपाधि 'संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार', 'तानसेन उपाधि' (मध्य प्रदेश), डी. लिट्
प्रसिद्धि शास्त्रीय गायक
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी 1976 में फ्राँस सरकार ने राम चतुर मल्लिक के ध्रुपद-धमार के रिकार्ड को यूनेस्को प्रसारण के लिए चुना था।

पंडित राम चतुर मल्लिक (अंग्रेज़ी: Ram Chatur Mallik, जन्म- 5 अक्टूबर, 1902, बिहार; मृत्यु- 11 जनवरी, 1990) 'भारतीय शास्त्रीय संगीत' की ध्रुपद-धमार शैली के प्रसिद्ध गायक थे। इन्होंने ध्रुपद-धमार गायन शैली में सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी ख्याति प्राप्त की थी और देश का नाम रोशन किया। मल्लिक जी ध्रुपद, खयाल, ठुमरी और मैथिली लोकगीतों के अनुपम गायक थे।

जन्म

राम चतुर मल्लिक का जन्म 5 अक्टूबर, 1902 को बिहार के दरभंगा ज़िले के चमथा गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम 'पंडित राजित राम' था, जो कि दरभंगा महाराज के दरबार में प्रसिद्ध संगीतज्ञ थे। यह माना जाता है कि पंडित राम चतुर मल्लिक के पूर्वज राजस्थान से बिहार आ गये थे और संगीत में 'दरभंगा घराने' की नींव रखी थी।

शिक्षा

राम चतुर मल्लिक ने अपने चाचा 'क्षितिजपाल मल्लिक' से और बाद में सितार वादक 'रामेश्वर पाठक' से अपनी प्रारम्भिक शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ग्रहण की थी। दरभंगा के महाराज ने सन 1924 में इन्हें राज दरबारी नियुक्त किया। महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह के अनुज विश्वेश्वर सिंह के साथ 1937 में ये इंग्लैंण्ड और फ्राँस गए और वहाँ अपने शास्त्रीय संगीत से श्रोताओं को मुग्ध किया। वे मोनिया परम्परा और गौंडवानी के प्रतिनिधि गायक थे। उन्हें ठुमरी गायन में बनारस और गया की गायकी में समान दक्षता प्राप्त थी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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