रजनी कोठारी  

रजनी कोठारी
रजनी कोठारी
पूरा नाम रजनी कोठारी
जन्म 1928 ई.
मृत्यु 19 जनवरी, 2015
मृत्यु स्थान दिल्ली
अभिभावक फौजा लाल कोठारी (पिता)
पति/पत्नी हंसा कोठारी
संतान पुत्र- मिलोन और आशीष
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र शिक्षक, लेखक, राजीनीतिक विचारक
मुख्य रचनाएँ पॉलिटिक्स इन इंडिया (1970) कास्ट इन इंडियन पॉलिटिक्स (1973), रीथिंकिंग डेमोक्रेसी (2005) आदि
भाषा अंग्रेज़ी
पुरस्कार-उपाधि राइट लाइवलीहुड पुरस्कार (1985)
विशेष योगदान 'लोकायन' और 'विकासशील समाज अध्ययन पीठ' (सी.एस.डी.एस.) की स्थापना
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी रजनी कोठारी 'पीपुल्स यूनियन ऑफ़ सिविल लिबर्टीज' के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। कोठारी जी ने अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल दलित-पिछड़ी राजनीति को सूत्रबद्ध करने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भूमण्डलीकरण की ताक़तों के ख़िलाफ़ बौद्धिक नाकेबंदी करने के लिए किया।
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची

रजनी कोठारी (अंग्रेज़ी: Rajni Kothari, जन्म- 1928 ई. मृत्यु: 19 जनवरी, 2015) भारत के प्रसिद्ध शिक्षाविद, लेखक, राजनीतिक सिद्धांतकार तथा राजनीति विज्ञानी थे। इन्होंने वर्ष 1963 में 'सी.एस.डी.एस.' (विकासशील समाज अध्ययन पीठ) की स्थापना की थी। यह दिल्ली स्थित समाज विज्ञान तथा मानविकी से सम्बंधित अनुसंधान संस्थान है। कोठारी जी 'पीपुल्स यूनियन ऑफ़ सिविल लिबर्टीज' के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। अपने रचनाकाल के तीसरे दौर में उन्होंने आधुनिकता के वैचारिक ढाँचे को ख़ारिज किये बिना वैकल्पिक राजनीति का संधान करने का प्रयास किया था। 'लोकायन' नामक संस्थान की स्थापना रजनी कोठारी द्वारा वर्ष 1980 में की गई थी। कोठारी जी ने अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल दलित-पिछड़ी राजनीति को सूत्रबद्ध करने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भूमण्डलीकरण की ताक़तों के ख़िलाफ़ बौद्धिक नाकेबंदी करने के लिए किया।

जन्म तथा शिक्षा

रजनी कोठारी का जन्म 1928 में एक समृद्ध गुजराती व्यापारिक घराने में हुआ था। उनके पिता बर्मा में हीरों का व्यापार किया करते थे। उनकी शुरुआती शिक्षा-दीक्षा आयंगारों द्वारा चलाए जाने वाले रंगून के एक स्कूल में हुई। परिवार में बौद्धिकता की कोई परम्परा न होने के बावजूद रजनी कोठारी के पिता ने उन्हें सुशिक्षित करने में कोई कसर न छोड़ी। उनका बचपन बर्मा के अपेक्षाकृत खुले समाज में बीता। घर की छतों पर होने वाले सामूहिक नृत्यों, मंगोल और बौद्ध संस्कृति के मिले-जुले लुभावने रूप, दक्षिण भारतीय चेट्टियारों, गुजराती बनियों, वोहराओं, खोजाओं और मुसलमान व्यापारियों के मिश्रित भारतीय समुदाय के बीच गुज़ारे गये शुरुआती वर्षों ने उन्हें एक उदार मानस प्रदान किया।

भारतीय मार्क्सवाद के व्याख्याता

'लंदन स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स' से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद रजनी कोठारी ने कुछ दिन बड़ोदरा में क्लासिकल अर्थशास्त्र पढ़ाया। इस दौरान वे भारतीय मार्क्सवाद के प्रारम्भिक व्याख्याता और बाद में रैडिकल मानवतावाद के प्रमुख प्रवक्ता मानवेन्द्रनाथ राय से भी प्रभावित हुए। अपने जीवन के अंतिम दौर में पत्नी हंसा कोठारी और बड़े बेटे स्मितु कोठारी के निधन से आहत प्रोफ़ेसर कोठारी दिल्ली स्थित आवास में अपना समय गुज़ारते हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. दुबे, अभय कुमार। रजनी कोठारी: नये रैडिकलिज़म की खोज (हिन्दी) एबीपी न्यूज़। अभिगमन तिथि: 20 जनवरी, 2015।
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