मेवाड़ की चित्रकला  

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मेवाड़ की चित्रकला
शिकार के लिए जाते हुए मेवाड़ के प्रधानमंत्री अमीर चंद बडवा
विवरण मेवाड़ के परम्परागत फलक संयोजन में चित्रोषम तत्व रेखा, रूप, रंग एवं प्रतीकों के तकनीकी अंकन पद्धतियों की नवीन विधाएँ तथा रूपों में नवीन अभिप्राय अपना विशेष महत्व रखते हैं।
राज्य राजस्थान
ज़िला उदयपुर ज़िला
संबंधित लेख मेवाड़ की चित्रकला (तकनीकी), कुंभलगढ़, चित्तौड़, हल्दीघाटी
अन्य जानकारी मेवाड़ की चित्रांकन कला में विभिन्न मानवीय आभिव्यक्तियाँ बड़ी स्वाभाविकता से उकेरी गई हैं। इसमें जीवन के सभी रसों का चित्रण किया गया है।

मेवाड़ की चित्रकला काफ़ी लम्बे समय से ही लोगों का ध्यान आकर्षित करती रही है। यहाँ चित्रांकन की अपनी एक विशिष्ट परंपरा है, जिसे यहाँ के चित्रकार पीढ़ियों से अपनाते रहे हैं। 'चितारे'[1] अपने अनुभवों एवं सुविधाओं के अनुसार चित्रण के कई नए तरीके भी खोजते रहे। रोचक तथ्य यह है कि यहाँ के कई स्थानीय चित्रण केन्द्रों में वे परंपरागत तकनीक आज भी जीवित हैं। तकनीकों का प्रादुर्भाव पश्चिमी भारतीय चित्रण पद्धति के अनुरूप ही ताड़पत्रों के चित्रण कार्यों में ही उपलब्ध होता है। यशोधरा द्वारा उल्लेखित षडांग के संदर्भ एवं 'समराइच्चकहा' एवं 'कुवलयमाला' कहा जैसे ग्रंथों में 'दट्ठुम' शब्द का प्रयोग चित्र की समीक्षा हेतु हुआ है, जिससे इस क्षेत्र की उत्कृष्ट परंपरा के प्रमाण मिलते हैं। ये चित्र मूल्यांकन की कसौटी के रूप में प्रमुख मानक तथा समीक्षा के आधार थे।

विकास क्रम

विकास के इस सतत् प्रवाह में विष्णुधर्मोत्तर पुराण, समरांगण सूत्रधार एवं चित्र लक्षण जैसे अन्य ग्रंथों में वर्णित चित्रकर्म के सिद्धांत का भी पालन किया गया है। परंपरागत कला सिद्धांतों के अनुरूप ही शास्त्रीय विवेचन में आये आदर्शवाद एवं यथार्थवाद का निर्वाह हुआ है। प्रारंभिक स्वरूपों का उल्लेख आठवीं सदी में हरिभद्रसूरि द्वारा रचित 'समराइच्चिकहा' एवं 'कुवलयमालाकहा' जैसे प्राकृत ग्रंथों से प्राप्त कला संदर्भों में मिलता है। इन ग्रंथों में विभिन्न प्रकार के रंग-तुलिका एवं चित्रफलकों का तत्कालीन साहित्यिक संदर्भों के अनुकूल उल्लेख मेवाड़ में प्रामाणित रूप से चित्रण के तकनीकी पक्ष का क्रमिक विकास यहीं से मानते हैं। यहाँ के चित्रावशेष 1229 ई. के उत्कीर्ण भित्तिचित्रों एवं 1260 ई के ताल पत्रों पर मिलते हैं।[2]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. चित्रकार वर्ग
  2. मेवाड़ चित्रकला की चित्रण सामग्री (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 14 जनवरी, 2013।
  3. चित्रकला की स्थानीय शब्दयुक्त योजनाएँ (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 14 जनवरी, 2013।
  4. चित्र संयोजन का विश्लेषणात्मक परीचय (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 14 जनवरी, 2013।
  5. मेवाड़ चित्रों के प्रमुख विषय (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 15 जनवरी, 2013।

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