मूली  

मूली

मूली ज़मीन के अन्दर पैदा होने वाली सब्ज़ी है। वस्तुतः यह एक रूपान्तिरत प्रधान जड़ है जो बीच में मोटी और दोनों सिरों की ओर क्रमशः पतली होती है। पूरे भारतवर्ष में जड़ों वाली सब्जियों में मूली एक प्रमुख फ़सल है। यह अन्तः फ़सल तथा सहचर फ़सलों के रूप में अन्य फ़सलों के साथ दो लाइनों के बीच में तथा धीरे-धीरे बढ़ने वाली फ़सलों के पौधों की लाइनों में उगाने के लिये यह बहुत ही लाभदायक फ़सल है। मूली में प्रोटीन, कैल्शियम, गंधक, आयोडिन तथा लौह तत्व पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं। इसमें सोडियम फास्फोरस, क्लोरीन तथा मैग्नीशियम भी हैं। मूली, विटामिन-ए का ख़ज़ाना है। विटामिन-बी और सी भी इसमें प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही मूली के पत्ते अधिक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। मूली के पत्ते गुणों की खान हैं, इनमें खनिज लवण, कैल्शियम, फास्फोरस आदि अधिक मात्रा में होते हैं।

इतिहास

इसके इतिहास एवं उत्पत्ति के बारे में बहुत से अलग-अलग विचार हैं, लेकिन ऐसा समझा जाता है कि इसका उत्पत्ति क्षेत्र केन्द्रीय एवं पश्चिमी चीन और भारत है। जहाँ पर यह प्राचीन समय से ही खाद्य-पदार्थ के रूप में उपयोग की जाती रही है। यह मेडीरेरियन क्षेत्र में जंगली रूप में पायी जाती हैं। अतः कुछ लोगों का ऐसा विश्वास है कि इसकी उत्पत्ति या जन्म स्थान दक्षिणी-पश्चिमी यूरोप है। पूरे भारतवर्ष में जड़ों वाली सब्जियों में मूली एक प्रमुख फ़सल है। यह अन्तः फ़सल तथा सहचर फ़सलों के रूप में अन्य फ़सलों के साथ दो लाइनों के बीच में तथा धीरे-धीरे बढ़ने वाली फ़सलों के पौधों की लाइनों में उगाने के लिये बहुत ही लाभदायक फ़सल है।

कृषक सभ्यता

मूली कृषक सभ्यता के सबसे प्राचीन आविष्कारों में से एक है। 3000 वर्षो से भी पहले के चीनी इतिहास में इसका उल्लेख मिलता है। अत्यंत प्राचीन चीन और यूनानी व्यंजनों में इसका प्रयोग होता था और इसे भूख बढ़ाने वाली समझा जाता था। यूरोप के अनेक देशों में भोजन से पहले इसको परोसने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। मूली शब्द संस्कृत के 'मूल' शब्द से बना है। आयुर्वेद में इसे मूलक नाम से, स्वास्थ्य का मूल अत्यंत महत्त्वपूर्ण बताया गया है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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