महेन्द्र कपूर  

महेन्द्र कपूर
महेन्द्र कपूर
जन्म 9 जनवरी, 1934
जन्म भूमि अमृतसर (पंजाब)
मृत्यु 27 सितम्बर, 2008
मृत्यु स्थान मुंबई
संतान तीन पुत्रियाँ व एक पुत्र (रोहन कपूर)
कर्म भूमि मुंबई
कर्म-क्षेत्र गायक
पुरस्कार-उपाधि 'राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार' (1968), 'फ़िल्म फ़ेयर अवार्ड' (1964, 1968, 1975), 'लता मंगेशकर पुरस्कार', 'पद्मश्री'
प्रसिद्धि देशभक्ति गीतों के लिए प्रसिद्ध
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी कैरियर के पूर्व ही आपने 'मेट्रो मर्फ़ी ऑल इंडिया गायन प्रतियोगिता' जीती थी। 1957 में इस प्रतियोगिता के जज संगीतकार नौशाद अली थे, जिन्होंने फ़िल्म 'सोहनी महिवाल' के गीत 'चांद छुपा और तारे डूबे' को महेन्द्र जी की आवाज़ में रिकॉर्ड किया।

महेन्द्र कपूर (अंग्रेज़ी: Mahendra Kapoor, जन्म- 9 जनवरी, 1934, पंजाब; मृत्यु- 27 सितम्बर, 2008, मुंबई) भारत के एक ऐसे गायक, जिनके गाये हुए गीत आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं। अपने गीतों से कई पीढ़ियों को सम्मोहित करने वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी महेन्द्र कपूर हिन्दी फ़िल्म संगीत के स्वर्णकाल की प्रमुख हस्तियों में से एक थे और जब भी देशभक्ति के गीतों का ज़िक्र होता है, लोगों के जेहन में सबसे पहला नाम उनका ही आता है। उनके गाये हुए देशभक्ति गीत लोगों को देश के लिए कुछ कर गुजरने की भावना से भर देने की अपूर्व क्षमता रखते हैं। 'मेरे देश की धरती सोना उगले...', 'भारत का रहने वाला हूँ...', 'अबके बरस तुझे धरती की...' जैसे गीतों के साथ देशभक्ति गीतों का पर्याय बन गए महेन्द्र कपूर ने अपने चार दशक के फ़िल्मी सफर में क़रीब 25 हज़ार गीत गाए। उनकी प्रतिभा सिर्फ़ हिन्दी तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने पंजाबी, मराठी, भोजपुरी आदि क्षेत्रीय भाषाओं के गीतों को भी स्वर दिया।

मुंबई आगमन

महेन्द्र कपूर का जन्म 9 जनवरी, 1934 को अमृतसर (पंजाब) में हुआ था। गायकी के क्षेत्र में कैरियर बनाने के लिए उन्होंने जल्द ही अमृतसर से मुंबई का रूख कर लिया। बचपन से ही महेन्द्र कपूर महान् गायक मोहम्मद रफ़ी से बहुत प्रभावित थे। वे एक तरह से मोहम्मद रफ़ी के शागिर्द थे और उनके प्रति उनके मन में अपार श्रद्धा थी। शायद यही वजह है कि कई बार उनके गानों में ख़ासकर शुरुआती दौर के उनके गानों में रफ़ी के प्रभाव की साफ़ झलक मिलती है। उनकी दिली इच्छा थी कि वह हिन्दी फ़िल्मों में गायें। शुरुआत में महेन्द्र कपूर ने शास्त्रीय संगीत की तालीम प्राप्त की थी। उन्होंने शास्त्रीय गायन और संगीत की शिक्षा पंडित हुस्नलाल, पंडित जगन्नाथ बुआ, उस्ताद नियाज अहमद ख़ान, अब्दुल रहमान ख़ान और तुलसीदास शर्मा से ली थी।

गायकी की शुरुआत

उनके जीवन में प्रमुख मोड़ उस समय आया, जब उन्होंने 'मेट्रो मर्फी ऑल इंडिया गायन प्रतियोगिता' जीत ली। 1957 में हुई इस प्रतियोगिता के जज संगीतकार नौशाद अली थे, जिन्होंने फ़िल्म 'सोहनी महिवाल' के गीत 'चांद छुपा और तारे डूबे' को महेन्द्र कपूर की आवाज़ में रिकॉर्ड किया। इसके बाद उनको वी. शांताराम की फ़िल्म 'नवरंग' में गाने को मौका मिला। इस फ़िल्म में उन्होंने "आधा है चंद्रमा रात आधी" गीत गाया था, जो कि कामयाब रहा। सी. रामचंद्र के संगीत से सजे इस गीत ने महेन्द्र कपूर के पाँव फ़िल्म जगत् में मजबूती से जमा दिए। इसके बाद उन्होंने 'भारत कुमार' के नाम से मशहूर मनोज कुमार और बी. आर. चोपड़ा के बैनर तले बनी अधिकतर फ़िल्मों के गीतों के लिए भी आवाज़ दी। एक समय महेन्द्र कपूर की आवाज़ 'भारत की जीवंत आवाज' कहलाती थी। देशभक्ति गीतों का ख्याल आते ही सबसे पहला नाम उनका ही आता था, लेकिन 'चलो एक बार फिर से' और 'किसी पत्थर की मूरत से' गाने से उनके गानों में विविधता प्रदर्शित होती है। इसके अलावा वह पहले भारतीय गायक थे, जिसने कोई अंग्रेज़ी गाना रिकॉर्ड किया था। यही नहीं महेन्द्र कपूर ने लगभग सभी भाषाओं में 25,000 से भी ज़्यादा गाने गाए।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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