मध्य प्रदेश आदिवासी लोक कला परिषद  

मध्य प्रदेश आदिवासी लोक कला परिषद की स्थापना वर्ष 1980 में की गई थी। मध्य प्रदेश की जनजातीय और लोक रूपंकर कलाओं, प्रदर्शनकारी कलाओं के संरक्षण, संवर्द्धन, प्रोत्साहन एवं सम्मान की दृष्टि से जनजातीय और लोक कलाओं की राज्य अकादेमी के रूप में इस परिषद की स्थापना की गयी है।

  • परिषद अपने गठन काल से ही मध्य प्रदेश की जनजातियों और अनुसूचित जातियों के जनजीवन, कला, साहित्य और संस्कृति पर केन्द्रित गोण्ड, बैगा, भील, मुरिया, दण्डामी-माड़िया, सहरिया, कोल, कोरकू, भतरा, दोर्ला, पहाड़ी-कोरबा और उराँव जनजातियों तथा बसदेवा, देवार और सतनामी अनुसूचित जातियों का सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण एवं प्रकाशन का कार्य भी किया गया है। 'चौमासा' इसका प्रतिष्ठित प्रकाशन है।[1]
  • इस परिषद ने रामकथा चित्र संकलन योजना के अंतर्गत अब तक बिहार की मधुबनी, उड़ीसा की पट्ट, पश्चिम बंगाल की पटुआ, आन्ध्र प्रदेश की कलमकारी और चेरियालपटम तथा महाराष्ट्र की चित्रकथा शैली में रामकथा के चित्र बनवाकर संकलित किये हैं, जो देश का अनूठा संग्रह है।
  • मध्य प्रदेश आदिवासी लोक कला परिषद द्वारा आयोजित राष्ट्रीय रामलीला मेले के अवसर पर प्रदर्शनी भी लगायी जाती है।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. मध्य प्रदेश आदिवासी लोक कला परिषद (हिन्दी) citybhopal.com। अभिगमन तिथि: 09 जून, 2018।

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