भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद  

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (भा.वा.अ.शि.प.) 'राष्ट्रीय वानिकी अनुसंधान तंत्र' में एक शीर्ष संस्था है। यह वानिकी के सभी पहलुओं पर अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार की आवश्यकता आधारित आयोजना, प्रोत्साहन, संचालन एवं समन्वयन करके वानिकी अनुसंधान का वास्तविक विकास करती है। परिषद विश्व चिंताओं, जैसे- जलवायु परिवर्तन, जैवविविधता का संरक्षण, रेगिस्तानीकरण को रोकना और संसाधनों का पोषणीय प्रबंध एवं विकास सहित इस सेक्टर में उभर रहे विषयों के अनुरूप समाधान आधारित वानिकी अनुसंधान करती है। परिषद द्वारा सामयिक अनुसंधान प्राकृतिक संसाधन प्रबंध से संबंधित चुनौतियों का सफलतापूर्वक संचालन करने के लिए, वन प्रबंधकों एवं शोधार्थियों की क्षमता में लोगों के विश्वास को बढ़ाता है।[1]

उद्देश्य

'भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद' के उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

  1. वनों और वन्य प्राणियों से संबंधित सामान्य सूचना और अनुसंधान के लिए एक वितरण केंद्र के रूप में कार्य करना।
  2. वानिकी विस्तार कार्यक्रमों को विकसित करना तथा उन्हें जन संचार, श्रव्य-दृश्य माध्यमों और विस्तार मशीनरी द्वारा प्रसारित करना।
  3. वानिकी अनुसंधान और शिक्षा एवं इनके अनुप्रयोग के लिए सहायता और प्रोत्साहन देना तथा समन्वयन करना।
  4. वानिकी तथा अन्य संबद्ध विज्ञानों के लिए राष्ट्रीय पुस्तकालय एवं सूचना केंद्र को विकसित करना और उसका रखरखाव करना।
  5. वानिकी अनुसंधान, शिक्षा और संबद्ध विज्ञानों के क्षेत्र में परामर्शी सेवाएं प्रदान करना।
  6. उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अन्य सभी आवयश्क कार्य करना।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 13 सितम्बर, 2013।

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=भारतीय_वानिकी_अनुसंधान_एवं_शिक्षा_परिषद&oldid=374486" से लिया गया