भादवा माता मंदिर  

भादवा माता मंदिर
भादवा माता की मूति
विवरण भादवा माता मंदिर मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। मंदिर में भादवा माता सुंदर चांदी के सिंहासन पर विराजमाना हैं।
राज्य मध्य प्रदेश
जिला नीमच
धार्मिक मान्यता धार्मिक मान्यता
विशेष मान्यता पूरी होने पर लोग इस मंदिर में जिंदा मुर्गे और बकरी छोड़ जाते हैं। इसके अलावा, चांदी और सोने की आंख और हाथ भी माता को चढ़ाए जाते हैं।
संबंधित लेख मध्य प्रदेश, नीमच
अन्य जानकारी मंदिर में माता की मूर्ति के सामने चमत्कारिक ज्योति जलती रहती है। यह ज्योति कई वर्षों से बिना रुके लगातार जल रही है।

भादवा माता मंदिर मध्य प्रदेश के नीमच शहर से लगभग 18 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर में भादवा माता सुंदर चांदी के सिंहासन पर विराजमाना हैं। माता की मूर्ति के सामने चमत्कारिक ज्योति जलती रहती है। यह ज्योति कई वर्षों से बिना रुके लगातार जल रही है। ऐसा माना जाता है कि भादवा माता रोज मंदिरों का फेरा लगाती हैं। वह अपने भक्तों को आशीर्वाद देकर निरोगी बनाती हैं, इसलिए दूर-दूर से माँ के भक्त मंदिर के सामने ही विश्राम कर रात गुजारते हैं। लोगों का ऐसा विश्वास है कि माता के आशीर्वाद से लकवा, नेत्रहीनता, कोढ़ आदि से ग्रस्त रोगी निरोगी होकर घर जाते हैं।

मोहक प्रतिमा

भादवा माता के मंदिर में चाँदी के सिंहासन पर विराजित है माँ की चमत्कारी मूर्ति। इस मूर्ति के नीचे माँ नवदुर्गा के नौ रूप विराजित हैं। कहते हैं मूर्ति भी चमत्कारी है। इससे भी कहीं अधिक चमत्कारी वह ज्योत है, जो कई सालों से अखंडित रूप से जलती जा रही है। यह ज्योत कभी नहीं बुझी और माँ के चमत्कार भी कभी नहीं रुके। आज भी यह ज्योत माँ की प्रतिमा के समीप ही प्रज्ज्वलित हो रही है।[1]

चमत्कार

माता के इस मंदिर में साक्षात चमत्कार देखने को मिलते हैं। देश के अलग-अलग इलाकों से यहाँ लकवा ग्रस्त व नेत्रहीन रोगी आते हैं, जो माँ के मंदिर के सामने ही ‍रात्रि विश्राम करते हैं। बारह महीने यहाँ भक्तों का जमावड़ा रहता है। मंदिर परिसर में इधर-उधर डेरा डाले कई लकवा रोगी देखने को मिल जाएँगे, जो निरोगी होने की उम्मीद से कई मीलों का सफर तय करके भादवा धाम आते हैं।

माता का फेरा

कहा जाता है कि रोज रात को माता मंदिर में फेरा लगाती हैं तथा अपने भक्तों को आशीष देकर उन्हें निरोगी करती हैं। इसीलिए रात्रि के समय श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में रुकते हैं और विश्राम करते हैं। कई लोग यहाँ आए तो दूसरों के कंधों के सहारे, परंतु गए बिना किसी सहारे के अपने पैरों पर।

प्राचीन बावड़ी

जब से मंदिर है, तब से यहाँ एक प्राचीन बावड़ी है। ऐसा कहा जाता है कि माता ने अपने भक्तों को निरोगी बनाने के लिए जमीन से यह जल निकाला था और कहा था कि मेरी इस बावड़ी के जल से जो भी स्नान करेगा, वह व्यक्ति रोगमुक्त हो जाएगा। मंदिर परिसर में स्थित बावड़ी का जल अमृत तुल्य है। माता की इस बावड़ी के चमत्कारी जल से स्नान करने पर समस्त शारीरिक व्याधियाँ दूर होती हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भादवा माता का चमत्कारी मंदिर (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 24 अक्टूबर, 2013।
  2. चमत्कारी भादवा माता मंदिर (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 24 अक्टूबर, 2013।

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