बलूचिस्तान  

बलूचिस्तान
खिलौना गाड़ी, नौशारो, बलूचिस्तान
विवरण बलूचिस्तान / बलोचिस्तान पाकिस्तान का पश्चिमी प्रांत है। यह ईरान (सिस्तान व बलूचिस्तान प्रांत) तथा अफ़ग़ानिस्तान के सटे हुए क्षेत्रों में बँटा हुआ है।
देश पाकिस्तान
राजधानी क्वेटा
भाषा बलूच या बलूची
आज़ादी 11 अगस्त 1947
विशेष बलूचिस्तान में देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ हिंगलाज माता का है।
अन्य जानकारी यह प्रदेश पाकिस्तान के सबसे कम आबाद इलाकों में से एक है।

बलूचिस्तान / बलोचिस्तान (अंग्रेज़ी: Balochistan) पाकिस्तान का पश्चिमी प्रांत है। बलूचिस्तान नाम का क्षेत्र बड़ा है और यह ईरान (सिस्तान व बलूचिस्तान प्रांत) तथा अफ़ग़ानिस्तान के सटे हुए क्षेत्रों में बँटा हुआ है। यहाँ की राजधानी क्वेटा है। यहाँ के लोगों की प्रमुख भाषा बलूच या बलूची के नाम से जानी जाती है। 1944 में बलूचिस्तान के स्वतंत्रता का विचार जनरल मनी के विचार में आया था पर 1947 में ब्रिटिश इशारे पर इसे पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया। 1970 के दशक में एक बलोच राष्ट्रवाद का उदय हुआ जिसमें बलोचिस्तान को पाकिस्तान से स्वतंत्र करने की माँग उठी। यह प्रदेश पाकिस्तान के सबसे कम आबाद इलाकों में से एक है।

इतिहास

भारत पिछले 15,000 वर्षों से अस्तित्व में है। अफ़ग़ानिस्तान, बलूचिस्तान, पाकिस्तान और हिन्दुस्तान सभी भारत के हिस्से थे। बलूचिस्तान आर्यों की प्राचीन धरती आर्यावर्त का एक हिस्सा है। प्राचीन काल में वैदिक युग में पारस (कालांतर में फारस) से लेकर गंगा, सरयू और ब्रह्मपुत्र तक की भूर्मी आर्यों की भूमि थी जिसमें सिंधु घाटी का क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण था। आर्यों के पंचनंद या पंचकुल अर्थात पुरु, यदु, तुर्वस, अनु और द्रुहु के कुल में से किसी एक कुल के हैं। भारत का प्राचीन इतिहास कहता है कि अफगानी, बलूच, पख्तून, पंजाबी, कश्मीरी आदि पश्‍चिम भारत के लोग पुरु वंश से संबंध रखते हैं अर्थात वे सभी पौरव हैं। पुरु वंश में ही आगे चलकर कुरु हुए जिनके वंशज कौरव कहलाए। 7,200 ईसा पूर्व अर्थात आज से 9,200 वर्ष पूर्व ययाति के इन पांचों पुत्रों में से पुरु का धरती के सबसे अधिक हिस्से पर राज था। बलूच भी मानते हैं कि हमारे इतिहास की शुरुआत 9 हजार वर्ष पूर्व हुई थी।[1]

हिंगलाज शक्तिपीठ

बलूचिस्तान में देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ हिंगलाज माता का है। बलूचिस्तान की भूमि पर दुर्गम पहाड़ियों के बीच माता का मंदिर है जहां माता का सिर गिरा था। यह मंदिर बलूचिस्तान के राज्य मंज में स्थित हिंगोल नदी के पास स्थित पहाड़ी पर है। इस स्थान पर भगवान श्रीराम, परशुराम के पिता जमदग्नि, गुरु गोरखनाथ, गुरु नानक देव भी आ चुके हैं। चारणों की कुल देवी हिंगलाज की माता ही थी। ये चारण लोग बलूची ही थे और आज इनका नाम कुछ और कबीले से जुड़ा हुआ है। बलूचिस्तान में भगवान बुद्ध की सैंकड़ों मूर्तियां पाई गईं। यहां किसी काल में बौद्ध धर्म अपने चरम पर था।

गांधार जनपद का हिस्सा

बलूचिस्तान भारत के 16 महाजनपदों में से एक जनपद संभवत: गांधार जनपद का हिस्सा था। चन्द्रगुप्त मौर्य का लगभग 321 ई.पू. का शासन पश्चिमोत्तर में अफ़ग़ानिस्तान और बलूचिस्तान तक फैला था। दार्द, हूण हुंजा, अम्बिस्ट आम्ब, पख्तू, कम्बोज, गांधार, कैकय, वाल्हीक बलख, अभिसार (राजौरी), कश्मीर, मद्र, यदु, तृसु, खांडव, सौवीर सौराष्ट्र, कुरु, पांचाल, कौशल, शूरसेन, किरात, निषाद, मत्स, चेदि, उशीनर, वत्स, कौशाम्बी, विदेही, अंग, प्राग्ज्योतिष (असम), घंग, मालवा, अश्मक, कलिंग, कर्णाटक, द्रविड़, चोल, शिवि शिवस्थान-सीस्टान-सारा बलूच क्षेत्र, सिंध का निचला क्षेत्र दंडक महाराष्ट्र सुरभिपट्टन मैसूर, आंध्र तथा सिंहल सहित लगभग 200 जनपद महाभारत में वर्णित हैं। इनमें से प्रमुख 30 ने महाभारत के युद्ध में भाग लिया था।[1]

बलूचिस्तान पर अंग्रेज़ों का कब्ज़ा

बलूच राष्ट्रवादी आंदोलन 1666 में स्थापित मीर अहमद के कलात की खानत को अपना आधार मानता है। मीर नसीर खान के 1758 में अफगान की अधीनता कबूल करने के बाद कलात की सीमाएं पूरब में डेरा गाजी खान और पश्चिम में बंदर अब्बास तक फैल गईं। ईरान के नादिर शाह की मदद से कलात के खानों ने ब्रहुई आदिवासियों को एकत्रित किया और सत्ता पर काबिज हो गए। ‘प्रथम अफगान युद्ध (1839-42) के बाद अंग्रेंजों ने इस क्षेत्र पर अधिकार जमा लिया। 1869 में अंग्रेजों ने कलात के खानों और बलूचिस्तान के सरदारों के बीच झगड़े की मध्यस्थता की। वर्ष 1876 में रॉबर्ट सैंडमेन को बलूचिस्तान का ब्रिटिश एजेंट नियुक्त किया गया और 1887 तक इसके ज्यादातर इलाके ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन आ गए।

अंग्रेज़ों से बलूचिस्तान की आज़ादी का संघर्ष

अंग्रेज़ों ने बलूचिस्तान को 4 रियासतों में बांट दिया- कलात, मकरान, लस बेला और खारन। 20वीं सदी में बलूचों ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष छेड़ दिया। इसके लिए 1941 में राष्ट्रवादी संगठन अंजुमान-ए-इत्तेहाद-ए-बलूचिस्तान का गठन हुआ। वर्ष 1944 में जनरल मनी ने बलूचिस्तान की स्वतंत्रता का स्पष्ट विचार रखा। इधर, आजम जान को कलात का खान घोषित किया गया। लेकिन आजम जान खान सरदारों से जा मिला। उसकी जगह नियुक्त उसका उत्तराधिकारी मीर अहमद यार खान अंजुमन के प्रति तो वह अपना समर्थन व्यक्त करता था, लेकिन वह अंग्रेजों से रिश्ते तोड़ कर बगावत के पक्ष में नहीं था। यही कारण था कि बाद में अंजुमन को कलात स्टेट नेशनल पार्टी में बदल दिया गया। आजम जान खान ने इस पार्टी को 1939 में गैरकानूनी घोषित कर दिया। ऐसे में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को पकड़ लिया गया या उन्हें निर्वासन झेलना पड़ा। 1939 में अंग्रेजों की राजनीति के तहत बलूचों की मुस्लिम लीग पार्टी का जन्म हुआ, जो हिन्दुस्तान के मुस्लिम लीग से जा मिली। दूसरी ओर एक ओर नई पार्टी अंजुमन-ए-वतन का जन्म हुआ जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़ गई। अंजुमन के कांग्रेस के साथ इस जुड़ाव में ख़ान अब्दुलगफ़्फ़ार ख़ाँ की भूमिका अहम थी। मीर यार खान ने स्थानीय मुस्लिम लीग और राष्ट्रीय मुस्लिम लीग दोनों को भारी वित्तीय मदद दी और मुहम्मद अली जिन्ना को कलात राज्य का कानूनी सलाहकार बना लिया।

जिन्ना की सलाह पर यार खान 4 अगस्त 1947 को राजी हो गया कि ‘कलात राज्य 5 अगस्त 1947 को आजाद हो जाएगा और उसकी 1938 की स्थिति बहाल हो जाएगी।’ उसी दिन पाकिस्तानी संघ से एक समझौते पर दस्तखत हुए। इसके अनुच्छेद 1 के मुताबिक ‘पाकिस्तान सरकार इस पर रजामंद है कि कलात स्वतंत्र राज्य है जिसका वजूद हिन्दुस्तान के दूसरे राज्यों से एकदम अलग है।’ लेकिन अनुच्छेद 4 में कहा गया कि ‘पाकिस्तान और कलात के बीच एक करार यह होगा कि पाकिस्तान कलात और अंग्रेजों के बीच 1839 से 1947 से हुए सभी करारों के प्रति प्रतिबद्ध होगा और इस तरह पाकिस्तान अंग्रेजी राज का कानूनी, संवैधानिक और राजनीतिक उत्तराधिकारी होगा।’ अनुच्छेद 4 की इसी बात का फायदा उठाकर पाकिस्तान ने कलात के खान को 15 अगस्त 1947 को एक फरेबी और फंसाने वाली आजादी देकर 4 महीने के भीतर यह समझौता तोड़कर 27 मार्च 1948 को उस पर औपचारिक कब्जा कर लिया। पाकिस्तान ने बलूचिस्तान के बचे 3 प्रांतों को भी जबरन पाकिस्तान में मिला लिया था।[2]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 बलूचिस्तान का प्राचीन इतिहास और समस्या की वजहें (हिंदी) वेब दुनिया। अभिगमन तिथि: 19 जनवरी, 2018।
  2. 2.0 2.1 2.2 बलूचिस्तान का प्राचीन इतिहास और समस्या की वजहें (हिंदी) वेब दुनिया। अभिगमन तिथि: 28 जनवरी, 2018।

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