बलराम जाखड़  

बलराम जाखड़
बलराम जाखड़
पूरा नाम बलराम जाखड़
जन्म 23 अगस्त, 1923
जन्म भूमि फिरोज़पुर ज़िला, पंजाब
मृत्यु 3 फ़रवरी, 2016
नागरिकता भारतीय
पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
पद लोकसभा अध्यक्ष और मध्यप्रदेश के राज्यपाल
कार्य काल अध्यक्ष- 22 जनवरी, 1980 - 18 दिसम्बर, 1989 (दस साल); राज्यपाल- 30 जून, 2004 से 29 जून, 2009 (पाँच साल)
शिक्षा संस्कृत ऑनर्स में स्नातक
विद्यालय फॉरमेन क्रिश्चियन कालेज, लाहौर
भाषा अंग्रेज़ी, संस्कृत, हिन्दी, उर्दू और पंजाबी
पुरस्कार-उपाधि ऑल इंडिया उद्यान पंडित, 'डॉक्टर ऑफ साइंस' और 'विद्या मार्तण्ड'
बाहरी कड़ियाँ समकालीन भारतीय राजनीति पर "पीपुल, पार्लियामेंट एण्ड एडमिनिस्ट्रेशन" नामक प्रामाणिक पुस्तक लिखी है।
अद्यतन‎

बलराम जाखड़ (अंग्रेज़ी: Balram Jakhar, जन्म: 23 अगस्त, 1923; मृत्यु- 3 फ़रवरी, 2016) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष हैं। वे मध्य प्रदेश राज्य के राज्यपाल भी रहे हैं। डॉ. बलराम जाखड़ ने सातवीं लोक सभा के लिए अपने सर्वप्रथम निर्वाचन के तुरन्त बाद अध्यक्ष पद प्राप्त करके अपने संसदीय जीवन की शुरूआत करने का गौरव प्राप्त किया। उन्हें लगातार दो बार लोक सभा में पूर्ण अवधि के लिए सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुने जाने का अनूठा सम्मान भी प्राप्त हुआ। कृषक से राजनीतिज्ञ बने बलराम जाखड़ ने लोकसभा अध्यक्ष पद की चुनौतियों का पूरी जीवंतता से मुकाबला किया और पूर्ण गरिमा, शालीनता और निष्पक्षता से सभा की कार्यवाही का संचालन किया। उन्होंने अपने दल में सक्रिय भूमिका निभाने तथा इसके जरिए देश के सामाजिक-राजनीतिक जीवन में सक्रिय बने रहने के लिए वर्ष 1989 में अध्यक्ष पद का त्याग कर दिया।

जीवन परिचय

बलराम जाखड़ का जन्म 23 अगस्त, 1923 को पंजाब राज्य के फिरोजपुर ज़िले में पंजकोसी गांव में हुआ था। उनका शैक्षिक जीवन बहुत प्रतिभाशाली रहा। उन्होंने वर्ष 1945 में फॉरमेन क्रिश्चियन कालेज, लाहौर से संस्कृत ऑनर्स में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वह, वस्तुतः बहुभाषाविद् हैं और उन्हें अंग्रेज़ी, संस्कृत, हिन्दी, उर्दू और पंजाबी का गहन ज्ञान है। जाखड़ मूलतः एक कृषक और विशेष रूप से फलोद्यानी हैं। स्नातक स्तर तक शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात् उन्होंने अपने कृषि के पारिवारिक व्यवसाय को अपनाया तथा अपनी कृषि-भूमि पर फलों और अंगूरों के बागों के विकास के लिए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया। अनेक वर्षों तक कठोर परिश्रम करके वह अरसे से बंजर पड़ी ज़मीनों को हरे-भरे चरागाहों तथा फलते-फूलते फलोद्यानों और अंगूरों के बागों में परिवर्तित करने में सफल हुए जिससे उनकी पैदावार कई गुणा बढ़ गई। फल उगाने के क्षेत्र में जाखड़ की सेवाओं को राष्ट्रीय मान्यता तब प्राप्त हुई, जब वर्ष 1975 में उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा "ऑल इंडिया उद्यान पंडित" की उपाधि प्रदान की गई। इसी वर्ष उन्हें वाशिंगटन में कृषि उत्पादकों के अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने वाले कृषक शिष्टमंडल के नेतृत्व के लिए चुना गया। इसी अवधि के दौरान वह पंजाब सहकारी अंगूर उत्पादक महासंघ तथा राज्य के कृषक मंच के अध्यक्ष भी चुने गए। कृषि के क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता प्रदान करते हुए उन्हें हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार और गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार द्वारा क्रमशः "डॉक्टर ऑफ साइंस" और "विद्या मार्तण्ड" की मानद उपाधियां प्रदान की गईं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

बाहरी कड़ियाँ

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