बलराज साहनी  

बलराज साहनी
बलराज साहनी
पूरा नाम युधिष्ठर साहनी (वास्तविक नाम)
प्रसिद्ध नाम बलराज साहनी
जन्म 1 मई, 1913
जन्म भूमि रावलपिंडी, भारत (अब पाकिस्तान)
मृत्यु 13 अप्रैल, 1973
मृत्यु स्थान मुंबई, महाराष्ट्र
पति/पत्नी दमयंती
संतान परीक्षत साहनी
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र अभिनेता
मुख्य फ़िल्में काबुली वाला, लाजवंती, हक़ीक़त, दो बीघा ज़मीन, धरती के लाल, गर्म हवा, वक़्त, दो रास्ते आदि।
शिक्षा अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर
विद्यालय गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर
नागरिकता भारतीय
संबंधित लेख भीष्म साहनी
अन्य जानकारी बलराज साहनी बेहतरीन साहित्यकार भी थे। उन्होंने 'पाकिस्तान का सफ़र' और 'रूसी सफरनामा' जैसे चर्चित यात्रा वृतांतों की रचना की थी, जिनमें उन देशों की राजनीतिक, भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों का शानदार चित्रण किया गया है।

बलराज साहनी (अंग्रेज़ी: Balraj Sahni, जन्म: 1 मई, 1913; मृत्यु: 13 अप्रैल, 1973) हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता थे। उनका जन्म रावलपिंडी (पाकिस्तान) में हुआ था। बलराज साहनी ख्याति प्राप्त लेखक भीष्म साहनी के बड़े भाई व चरित्र अभिनेता परीक्षत साहनी के पिता थे। वे रंगमंच और सिनेमा की अप्रतिम प्रतिभा थे। बलराज साहनी को एक ऐसे अभिनेता के रूप में जाना जाता था, जिन्हें रंगमंच और फ़िल्म दोनों ही माध्यमों में समान दिलचस्पी थी। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को पर्दे के पात्र से भावनात्मक रूप से जोड़ देते थे।

जन्म तथा शिक्षा

रावलपिंडी में एक मध्यम वर्गीय व्यवसायी परिवार में 1 मई, 1913 को बलराज साहनी का जन्म हुआ था। उनका मूल नाम 'युधिष्ठर साहनी' था। बलराज साहनी का झुकाव बचपन से ही पिता के पेशे की ओर न होकर अभिनय की ओर था। उन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य में स्नात्तकोत्तर की शिक्षा लाहौर के मशहूर 'गवर्नमेंट कॉलेज' से पूरी की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद बलराज साहनी रावलपिंडी लौट गये और पिता के व्यापार में उनका हाथ बंटाने लगे।

महात्मा गाँधी से सम्पर्क

वर्ष 1930 के अंत में बलराज साहनी और उनकी पत्नी दमयंती रावलपिंडी को छोड़कर गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर के 'शांति निकेतन' पहुंचे, जहां बलराज साहनी अंग्रेज़ी के शिक्षक नियुक्त हुए। वर्ष 1938 में बलराज साहनी ने महात्मा गांधी के साथ भी काम किया। इसके एक वर्ष के पश्चात् महात्मा गांधी के सहयोग से बलराज साहनी को बीबीसी के हिन्दी के उद्घोषक के रूप में इंग्लैंड में नियुक्त किया गया। लगभग पांच वर्ष के इग्लैंड प्रवास के बाद वह 1943 में भारत लौट आये।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी बलराज साहनी ने (हिंदी) देशबंधु। अभिगमन तिथि: 9 फ़रवरी, 2013।
  2. भीष्म साहनी की नजर से बलराज साहनी (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 06 अप्रैल, 2014।

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