बलदेव वंशी  

बलदेव वंशी
डॉ. बलदेव वंशी
पूरा नाम डॉ. बलदेव वंशी
जन्म 1 जून, 1938
जन्म भूमि मुल्तान, पाकिस्तान
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र अध्यापक, कवि, लेखक
मुख्य रचनाएँ दादू ग्रंथावली, सन्त मलूकदास ग्रंथावली, इतिहास में आग, पत्थर तक जाग रहे हैं, उपनगर में वापसी, अंधेरे के बावजूद, बगो की दुनिया आदि।
भाषा हिन्दी
पुरस्कार-उपाधि 'कबीर शिखर सम्मान', 'मलूक रत्न सम्मान', 'दादू शिखर सम्मान'
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी अध्यापन कार्य से अवकाश प्राप्त डॉ. बलदेव वंशी ने न केवल साहित्य की विविध् विधाओं में अपनी कलम चलाई वरन् हिन्दी के प्रचार-प्रसार के कार्य में सक्रिय भागीदारी भी की
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डॉ. बलदेव वंशी (अंग्रेज़ी: Baldev Vanshi, जन्म: 1 जून, 1938) हिन्दी साहित्य जगत् का एक जाना-माना नाम है। इनका व्यक्तित्व जीवन संघर्षों की आंच में तपा है। अध्यापन कार्य से अवकाश प्राप्त डॉ. बलदेव वंशी ने न केवल साहित्य की विविध् विधाओं में अपनी कलम चलाई वरन् हिन्दी के प्रचार-प्रसार के कार्य में सक्रिय भागीदारी भी की। इन्हें हिन्दी को लेकर दिल्ली के यू.पी.एस.सी. पर चलने वाले संभवतः सबसे लंबे धरने का अहम् हिस्सा रहे।

जीवन परिचय

डॉ. बलदेव वंशी का जन्म 1 जून, 1938 को पाकिस्तान के मुल्तान शहर में हुआ था। डॉ. बलदेव वंशी ने कहानियां व समीक्षात्मक लेख भी लिखे पर इनका मन कविता में ही सर्वाधिक रमा। अपनी कविताओं की अनूठी बिंब योजना को लेकर बलदेव वंशी खासे चर्चित रहे। अनेक सम्मानों से सम्मानित व देश-विदेश की अनेक साहित्यिक यात्रा कर चुके डॉ. बलदेव वंशी एक लंबे समय से संत साहित्य पर कार्य कर रहे हैं और आज यह उनकी विशेष पहचान बन चुका है। संत साहित्य पर उनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और पाठकों द्वारा प्रशंसा प्राप्त कर चुकी हैं। इन दिनों आप ‘विश्व संत साहित्य कोश’ की एक बड़ी योजना को लेकर कार्य कर रहे हैं।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. साक्षात्कार – सबसे अधिक संवेदनशीलता कविता में प्रकट होती है – डॉ. बलदेव वंशी (हिन्दी) प्रवासी दुनिया। अभिगमन तिथि: 24 मार्च, 2015।
  2. 2.0 2.1 दैनिक जागरण 23 मार्च, 2015

बाहरी कड़ियाँ

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