बद्रीनाथ  

बद्रीनाथ
बद्रीनाथ मंदिर
वर्णन गंगा नदी की मुख्य धारा के किनारे बसा यह तीर्थस्थल समुद्र तल से 3,050 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
स्थान चमोली, उत्तराखण्ड
निर्माता आदि शंकराचार्य
निर्माण काल 9वीं शताब्दी
देवी-देवता बद्रीनारायण (विष्णु)
भौगोलिक स्थिति 30° 44′ 40.9″ उत्तर, 79° 29′ 28.23″ पूर्व
संबंधित लेख चार धाम यात्रा, बद्री नाथ जी की आरती
प्रसिद्धि यह भारत के चार प्रमुख धामों में से एक है।
अन्य जानकारी बद्रीनाथ का नामकरण एक समय यहाँ प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली जंगली बेरी बद्री के नाम पर हुआ।

बद्रीनाथ उत्तरांचल राज्य, उत्तरी भारत, शीत ऋतु में निर्जुन रहने वाला एक गांव एवं मंदिर है। गंगा नदी की मुख्य धारा के किनारे बसा यह तीर्थस्थल हिमालय में समुद्र तल से 3,050 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह अलकनंदा नदी के बाएं तट पर नर और नारायण नामक दो पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित है। बद्रीनाथ का नामकरण एक समय यहाँ प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली जंगली बेरी बद्री के नाम पर हुआ। यह भारत के चार प्रमुख धामों में से एक है।

महत्व

बद्रीनाथ उत्तर दिशा में हिमालय की अधित्यका पर हिन्दुओं का मुख्य यात्रा धाम माना जाता है। मन्दिर में नर-नारायण विग्रह की पूजा होती है और अखण्ड दीप जलता है, जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है। बद्रीनाथ भारत के चार धामों में प्रमुख तीर्थ है। प्रत्येक हिन्दू की यह कामना होती है कि वह बद्रीनाथ का दर्शन एक बार अवश्य करे। यहाँ पर शीत के कारण अलकनन्दा में स्नान करना अत्यन्त ही कठिन है। अलकनन्दा के तो दर्शन ही किये जाते हैं। यात्री तप्तकुण्ड में स्नान करते हैं। वनतुलसी की माला, चले की कच्ची दाल, गिरी का गोला और मिश्री आदि का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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