पोलो  

पोलो
पोलो खेलते खिलाड़ी
विवरण पोलो एक टीम खेल है जिसे घोड़ों पर बैठ कर खेला जाता है। इसमें प्रत्येक टीम में चार खिलाड़ी होते हैं। जो प्रतिद्वंदी टीम के विरुद्ध गोल करते हैं।
दल के सदस्य प्रत्येक टीम में चार
उपकरण बॉल, स्टिक व घोड़े।
अन्य जानकारी पोलो लीग की शुरुआत भारत में जयपुर, राजस्थान से हुई थी। इस लीग की खास बात यह रही कि ट्रैडिशनल पोलो के विपरीत यह रात में खेला गया।
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पोलो (अंग्रेज़ी: Polo) एक टीम खेल है, जिसे घोड़ों पर बैठकर खेला जाता है। इसका उद्देश्य प्रतिद्वंदी टीम के विरुद्ध गोल करना होता है। इसे ब्रिटिश काल के दौरान काफ़ी ख्याति मिली। इसमें खिलाड़ी एक प्लास्टिक या लकड़ी की गेंद को बड़े हॉकी जैसे डंडों से मारकर सामने वाली टीम के गोल में डालने की कोशिश करते हैं। परम्परागत तरीक़े में यह खेल बड़ी रफ़्तार से एक बड़े खुले मैदान में खेला जाता है। हर टीम में चार खिलाड़ी होते हैं। पोलो का उद्भव प्राचीन फ़ारस से माना जाता है। फ़ारस में 525 ई. पूर्व में 'पुळु' के नाम से यह खेल खेला जाता था। कुछ लोग भारतीय राज्य मणिपुर से इसका उद्भव मानते हैं। भारत से यह खेल 10वीं हुसार रेजीमेंट द्वारा 1869 में इंग्लैण्ड ले जाया गया।

लीग शुरुआत

आईपीएल समेत प्रो कबड्डी लीग और कुश्ती लीग की तर्ज पर देश की पहली पोलो लीग की शुरुआत हुई। इसका आगाज जयपुर से हुआ था। मार्च के पहले सप्ताह से शुरू होने वाली इस लीग की खास बात यह रही कि ट्रैडिशनल पोलो के विपरीत यह रात में खेला गया। जिसमें देश-विदेश के पोलो खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। लीग के संस्थापक चिराग पारीक ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा था कि बाकी लीग की तरह पोलो लीग में भी खिलाड़ियों की नीलामी हुई थी। पोलो लीग के सभी मैच फ्लडलाइट्स में खेले गए। रात में गेंद पर खिलाड़ियों का फोकस रहे, इसीलिए सफ़ेद की जगह रंगीन गेंद का प्रयोग किया गया।[1]

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