पान  

पान
Paan

पान इसी नाम की लताविशेष का पत्ता है, जो भारत में सर्वत्र अतिथि की अभ्यर्थना का अत्यंत प्रचलित साधन है। यह अनुमान है कि पान का प्रसार जावा से हुआ। इसकी पैदावार उष्ण देश में सीली ज़मीन पर होती है। पान की कृषि भारत, श्रीलंका और बर्मा (वर्तमान म्यांमार) में होती है। इसमें ताप और जल का समान महत्त्व है। भारत के विभिन्न प्रदेशों में इसकी खेती की विभिन्न विधियाँ हैं।

लताओं की देखभाल

पान की लताओं की बड़ी सावधानी के साथ देखभाल करनी पड़ती है। इनमें कई प्रकार के रोग लग जाते हैं।

रोग

  • पान के पत्तों पर काले दाग़ पड़ जाते हैं तथा इनका आकार धीरे-धीरे बढ़ता है और पत्ते नष्ट हो जाते हैं।
  • पान के डंठलों का काला पड़ना और अंत में पत्तों का झड़ जाना।
  • पत्तों का सूखकर मुरझाना।
  • पत्तों के किनारे-किनारे लाली पड़ना।
  • किनारों पर पत्तों का मुड़ना।
  • अंगारी- यह रोग संक्रामक है। यह लता की गाँठ में होता है जिससे लता सूखकर काली हो जाती है। लता में रोग होते ही उसे उखाड़ फेंकना चाहिए और जड़ की काफ़ी मिट्टी भी फेंक देनी चाहिए, नहीं तो अन्य लताओं में भी रोग हो जाता है।
  • गांदी- जिसमें लता की जड़ लाल हो जाती है और लता सूखने लगती है। इन रोगों में लता की मिट्टी में लहसुन का रस देना लाभदायक होता है।
पान का पत्ता

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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