पाताल भुवनेश्वर  

पाताल भुवनेश्वर
पाताल भुवनेश्वर समीर द्वार
विवरण भारत के प्राचीनतम ग्रन्थ स्कन्द पुराण में वर्णित पाताल भुवनेश्‍वर की गुफ़ा के सामने पत्थरों से बना एक-एक शिल्प तमाम रहस्यों को खुद में समेटे हुए है। किंवदन्ती है कि यहाँ पर पाण्डवों ने तपस्या की और कलियुग में आदि शंकराचार्य ने इसे पुनः खोजा।
राज्य उत्तराखण्ड
ज़िला पिथौरागढ़
मार्ग स्थिति उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के प्रसिद्ध नगर अल्मोड़ा से शेराघाट होते हुए 160 किलोमीटर की दूरी तय कर पहाड़ी वादियों के बीच बसे सीमान्त कस्बे गंगोलीहाट में स्थित है।
कब जाएँ कभी भी जा सकते हैं
रेलवे स्टेशन काठगोदाम रेलवे स्टेशन
यातायात रेल, बस, कार
Map-icon.gif गूगल मानचित्र
संबंधित लेख एक हथिया देवाल, धारचुला, मुन्स्यारी
अन्य जानकारी स्कन्दपुराण में वर्णन है कि स्वयं महादेव शिव पाताल भुवनेश्वर में विराजमान रहते हैं और अन्य देवी देवता उनकी स्तुति करने यहाँ आते हैं।
बाहरी कड़ियाँ Patal Bhuvaneshwar

पाताल भुवनेश्वर पिथौरागढ़ जनपद उत्तराखंड राज्य का प्रमुख पर्यटक केन्द्र है। यहां देवदार के घने जंगलों के बीच यहां पर अनेक भूमिगत गुफ़ाओं का संग्रह है जिसमें से एक बड़ी गुफ़ा के अंदर शंकर जी का मंदिर स्थापित है। यह संपूर्ण परिसर 2007 से भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा अपने कब्जे में लिया गया है। हालांकि गुफ़ाओं के अन्दर प्रवेश आदि का कार्य अब भी स्थानीय स्तर पर बनी मंदिर कमेटी द्वारा किया जाता है। पाताल भुवनेश्वर निवासी मेजर समीर कोतवाल 28 अगस्त 1999 को आसाम में उग्रवादियों के एक गुट के साथ लडाई में शहीद हो गये थे। दिवंगत मेजर समीर कोतवाल की स्मृति में पाताल भुवनेश्वर कस्बे के प्रवेश द्वार को 'समीर द्वार' का नाम दिया गया है। पर्यटकों की सुविधा हेतु कुमाऊँ मण्डल विकास निगम का गेस्ट हाउस है।

पाताल भुवनेश्वर गुफ़ा

'पाताल भुवनेश्वर का गुफ़ा मंदिर' उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के प्रसिद्ध नगर अल्मोड़ा से शेराघाट होते हुए 160 किलोमीटर की दूरी तय कर पहाड़ी वादियों के बीच बसे सीमान्त कस्बे गंगोलीहाट में स्थित है। पाताल भुवनेश्वर गुफ़ा किसी आश्चर्य से कम नहीं है। इसके रास्ते में दिखाई देती हैं धवल हिमालय पर्वत की नयनाभिराम नंदा देवी, पंचचूली, पिंडारी, ऊंटाधूरा आदि चोटियां। दिल्ली से चल कर पहले दिन 350 किमी की दूरी तय कर अल्मोड़ा पहुंच सकते हैं।
पाताल भुवनेश्वर गुफ़ा मंदिर

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. स्कन्द पुराण के मानस खण्ड 103 अध्याय के 155 वें श्लोक में इसका वर्णन है। श्लोक 157 में वर्णित परिजात व कल्पतरू वृक्षों के बारे में वर्तमान में भी पुजारी चट्टानों की ओर इंगित करके उनके स्थान को दिखाता है।
  2. मानस खण्ड 103 अध्याय के श्लोक 275-276 में भी ये वर्णन है।
  3. स्कन्द पुराण मानसखंड 103/10-11

बाहरी कड़ियाँ

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=पाताल_भुवनेश्वर&oldid=612396" से लिया गया