निरुपा रॉय  

निरुपा रॉय
निरुपा रॉय
पूरा नाम निरुपा रॉय
अन्य नाम कोकिला बेन
जन्म 4 जनवरी, 1931
जन्म भूमि बलसाड, गुजरात
मृत्यु 13 अक्टूबर, 2004
पति/पत्नी कमल रॉय
संतान दो पुत्र- 'योगेश' और 'किरन'
कर्म भूमि गुजरात, मुंबई
कर्म-क्षेत्र अभिनय
मुख्य फ़िल्में 'गंगा तेरे देश में', 'छाया', 'शहनाई', 'मर्द', 'बेताब', 'शहीद', 'दीवार', 'अमर अकबर एंथनी', 'पाताल भैरवी', 'ग़रीबी', 'हर हर महादेव', 'चालबाज' 'पूरब और पश्चिम', 'लाल बादशाह' आदि।
पुरस्कार-उपाधि 'फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार' (तीन बार), 'मुनीम जी' (1956), 'छाया' (1962), 'शहनाई' (1965)
प्रसिद्धि माँ की भूमिका में प्रसिद्ध
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी निरुपा रॉय ने अपने सिने कैरियर की शुरुआत 1946 में प्रदर्शित गुजराती फ़िल्म 'गणसुंदरी' से की थी।

निरुपा रॉय (अंग्रेज़ी: Nirupa Roy; जन्म- 4 जनवरी, 1931, गुजरात; मृत्यु- 13 अक्टूबर, 2004) को हिन्दी सिनेमा में एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने अपने किरदारों से माँ के चरित्र को नये आयाम दिये। वैसे उनका मूल नाम 'कोकिला बेन' था। भारतीय सिनेमा में जब भी माँ के किरदार को सशक्त करने की बात आती है तो सबसे पहला नाम निरुपा रॉय का ही आता है, जिन्होंने अपनी बेमिसाल अदायगी से माँ के किरदार को हिन्दी सिनेमा में बुलन्दियों पर पहुँचाया। इस बेहतरीय अदाकारा को तीन बार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का 'फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार' देकर सम्मानित किया गया था।

जन्म तथा परिवार

निरुपा रॉय का जन्म 4 जनवरी, 1931 को गुजरात राज्य के बलसाड में एक मध्यमवर्गीय गुजराती परिवार में हुआ था। गौर वर्ण की वजह से उन्हें 'धोरी चकली' कहकर पुकारा जाता था। उनके पिता रेलवे में सरकारी नौकर थे। निरुपा रॉय ने चौथी तक शिक्षा प्राप्त की। जब वह मात्र 15 साल की ही थीं, उनका उनका विवाह मुंबई में कार्यरत राशनिंग विभाग के कर्मचारी कमल रॉय से हो गया। विवाह के बाद निरुपा रॉय भी मुंबई आ गईं। रॉय दम्पत्ति दो पुत्रों के माता-पिता भी बने, जिनके नाम 'योगेश' और 'किरन' रखे गये।

प्रारम्भिक संघर्ष

उन्हीं दिनों निर्माता-निर्देशक बी. एम. व्यास अपनी नई फ़िल्म 'रनकदेवी' के लिए नए चेहरों की तलाश कर रहे थे। उन्होंने अपनी फ़िल्म में कलाकारों की आवश्यकता के लिए अख़बार में विज्ञापन दिया। निरुपा रॉय के पति फ़िल्मों के बेहद शौकीन थे और अभिनेता बनने की इच्छा रखते थे। कमल रॉय अपनी पत्नी को लेकर बी. एम. व्यास से मिलने गए और अभिनेता बनने की पेशकश की, लेकिन बी. एम. व्यास ने कहा कि उनका व्यक्तित्व अभिनेता बनने के लायक़ नहीं है। लेकिन यदि वह चाहें तो उनकी पत्नी को फ़िल्म में अभिनेत्री के रूप में काम मिल सकता है। फ़िल्म 'रनकदेवी' में निरुपा रॉय 150 रुपये प्रति माह पर काम करने लगीं। किंतु कुछ समय बाद ही उन्हें भी इस फ़िल्म से अलग कर दिया गया। यह निरुपा रॉय के संघर्ष की शुरुआत थी।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 निरुपा रॉय (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 4 अक्टूबर, 2012।

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