नंदकुमार  

नंदकुमार बंगाल का एक प्रमुख फ़ौजदार था, जो 1757 ई. में रॉबर्ट क्लाइव तथा वाटसन द्वारा चन्द्रनगर के फ़्राँसीसियों पर आक्रमण करने के समय हुगली में नियुक्त था। नंदकुमार के अधीन बंगाल के नवाब की एक बड़ी सैन्य टुकड़ी थी, जिसका प्रयोग वह अंग्रेज़ों के आक्रमण के समय फ़्राँसीसियों की रक्षा के लिए कर सकता था। किन्तु उक्त आक्रमण के पूर्व नंदकुमार अपने अधीनस्थ सैनिकों को लेकर हुगली से दूर चला गया और अंग्रेज़ों ने सरलता से चन्द्रनगर पर अधिकार कर लिया।

हेस्टिंग्स से मतभेद

यह स्पष्ट है कि इस प्रकार के आचरण के लिए नंदकुमार को 'उत्कोच' (घूस) दिया गया था। प्लासी के युद्ध के उपरान्त वह नवाब मीर ज़ाफ़र का कृपापात्र बन गया और 1764 ई. में शाहआलम द्वितीय ने उसको 'महाराज' की उपाधि प्रदान की। उसी साल वारेन हेस्टिंग्स को हटाकर नंदकुमार को वर्धमान का कलक्टर नियुक्त कर दिया गया और इस कारण हेस्टिंग्स ने उसे कभी क्षमा नहीं किया। अगले ही वर्ष नंदकुमार को बंगाल का नायब सूबेदार नियुक्त किया गया, किन्तु शीघ्र ही उसे पदमुक्त करके वहाँ पर मुहम्मद रज़ा ख़ाँ की नियुक्ति कर दी गई। 1772 ई. में तत्कालीन गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने रज़ा ख़ाँ को हटा दिया तथा नंदकुमार की सहायता से उस पर मुक़दमा भी चलाया। किन्तु आरोप सिद्ध न हो सके और तभी से नंदकुमार और वारेन हेस्टिंग्स में मतभेद हो गया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

भारतीय इतिहास कोश |लेखक: सच्चिदानन्द भट्टाचार्य |प्रकाशक: उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान |पृष्ठ संख्या: 216 |


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