त्रिपुरी  

त्रिपुरी आधुनिक मध्य प्रदेश के जबलपुर ज़िले में नर्मदा नदी तट पर स्थित है। इसकी अपनी भौगोलिक, धरीय अवस्थिति के कारण अधिक महत्त्व है। इसकी पहचान जबलपुर-भेड़ाघाट मार्ग पर स्थित तेवर ग्राम अथवा टेवर से की गई है। वृहत्संहिता में एक नगर के रूप में इसका वर्णन मिलता है। उत्तर भारत से दक्षिण भारत की ओर जाने वाले मार्ग के मध्य में स्थित होने के कारण त्रिपुरी का आर्थिक महत्त्व था। यहाँ से 500 ई.पू. से 400 ई. के मध्य की संस्कृतियों के अवशेष मिले हैं। मौर्योत्तर युग में यहाँ व्यापारिक संघों के द्वारा प्रशासनित होता था। पूर्व मध्यकाल में त्रिपुरी में कलचुरी वंश का शासन था।

इतिहास

सर्वप्रथम त्रिपुरी की खोज 1860 ई.में ले. कर्नल युले ने लार्ड कैनिंग के शिविर व्यवस्था की यात्रा के समय की। तदनंतर जनरल कनिंघम ने 1873 -1874 ई. में त्रिपुरी के अवशेषों पर एक सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रकाशित की। इसके पश्चात् कीलहार्न ने तेवर से प्राप्त अभिलेखों को प्रकाशित किया। 1922 ई. में राखालदास बनर्जी ने पूरे त्रिपुरी राज्य का सर्वेक्षण कर दि हैयहयाज ऑफ त्रिपुरी एण्ड देयर मोनुमेंट्स प्रकाशित किया। 1952 -1953 ई. में सागर विश्वविद्यालय के तत्वावधान में त्रिपुरी का पुरातात्विक कार्य कराया गया। इस उत्खनन में प्राप्त सफलता से सागर विश्वविद्यालय ने 1966 ई. व बाद में भी वहाँ अनेक उत्खनन कराये, जिससे त्रिपुरी की प्राचीनता पर महत्त्वपूर्ण प्रकाश पड़ा। त्रिपुरी के विभिन्न उत्खननों से उसके विभिन्न कालों का ज्ञान हुआ है, यथा-

  1. प्रथम काल (1000 ई.पू. से 500 ई.पू.)
  2. द्वितीय काल (500 ई.पू. से 300 ई.पू.)
  3. तृतीयक काल (300 ई. से 100 ई.पू.)
  4. चतुर्थ काल (100 ई. से 200 ई.)
  5. पंचम काल (200 ई.से 350 ई.)

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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