डिमेट्रियस  

दमित्रि अथवा दमेत्रियस

चित्रकार द्वारा डिमेट्रियस का सिक्के से बनाया हुआ चित्र

डेमेट्रियस अपने पिता 'यूथीडेमस' की मृत्यु के बाद राजा बना था। सम्भवतः सिकन्दर के बाद डेमेट्रियस पहला यूनानी शासक था, जिसकी सेना भारतीय सीमा में प्रवेश कर सकी थी। उसने एक बड़ी सेना के साथ लगभग 183 ई.पू. में हिन्दुकुश पर्वत को पार कर सिंध और पंजाब पर अधिकार कर लिया। डेमेट्रियस के भारतीय अभियान की पुष्टि पतंजलि के महाभाष्यण 'गार्गी संहिता' एवं मालविकाग्निमित्रम् से होती है। इस प्रकार डेमेट्रियास ने पश्चिमोत्तर भारत में इंडो-यूनानी सत्ता की स्थापना की। इसने साकल को अपनी राजधानी बनाया था। डेमेट्रियस ने भारतीय राजाओं की उपाधि धारण कर यूनानी तथा खरोष्ठी लिपि में सिक्के भी चलवाये थे।

साम्राज्य विस्तार

'दमित्रि' अथवा 'दमेत्रियस' हिन्दी-यूनानी शासक था। खारवेल के हाथी गु्फा के लेखों में दमेत्रियस की सेना सहित उपस्थिति पाटलिपुत्र से 70 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में स्थित राजगृह में बतायी गया है। सीरियन सम्राट एण्टियोकस के साथ सन्धि और विवाह सम्बन्ध हो जाने के अनन्तर बैक्ट्रिया के राजवंश की बहुत उन्नति हुई। उसने समीप के अनेक प्रदेशों को जीतकर अपने साम्राज्य का विस्तार किया। बैक्ट्रिया के इस उत्कर्ष का प्रधान श्रेय डेमेट्रियस को है, जो सीरियन सम्राट एण्टियोकस तृतीय का जामाता था।
डिमेट्रियस का सिक्का, बैक्ट्रिया
बैक्ट्रिया के राजाओं के इतिहास का परिज्ञान उनके सिक्कों के द्वारा होता है, जो कि अच्छी बड़ी संख्या में भारत व अन्य देशों में प्राप्त हुए हैं। ग्रीक लेखक स्ट्रैबो के अनुसार डेमेट्रियस और मिनान्डर के समय बैक्ट्रिया के यवन राज्य की सीमाएँ दूर-दूर तक पहुँच गई थीं। उत्तर में चीन की सीमा से लगाकर दक्षिण में सौराष्ट्र तक इन बैक्ट्रियन राजाओं का सम्राज्य विस्तृत था।

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