डिंडीगल क़िला  

डिंडीगल क़िला चेन्नई, तमिलनाडु से लगभग 400 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक सामरिक महत्त्व का स्थल है, जो घाटी में एक ऊँचे स्थान पर स्थित है। यहाँ से उत्तर मध्य काल में कर्नाटक की फौजों ने मदुरई में प्रवेश किया था। मैसूर के हैदर अली ने इस क़िले का पुन: निर्माण करवाया था। सन 1970 में इस क़िले पर अंग्रेज़ों का अधिकार स्थापित हो गया था।

इतिहास

संभवत: मदुरई के नायकों ने घाटी के ऊपर एक प्रमुख ऊँचे स्‍थान, एक चट्टान पर पहले क़िलेबंदी की थी, जिससे अपने देश को मैसूर की सेना से बचाया जा सके। तथापि ऐसा प्रतीत होता है कि हैदर अली ने इस क़िले का काफ़ी हद तक पुन: निर्माण करवाया था, क्‍योंकि कर्नाटक युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में अंग्रेज़ों पर आक्रमण करने के लिए उसने इसका प्रक्षेपण स्‍थल के रूप में प्रयोग किया। अंतत: अंग्रेज़ों ने सन 1790 में इस पर क़ब्ज़ा कर लिया तथा 1860 ई. तक इसमें अपने रक्षक सेना रखी।

संरचना

इस क़िले की अनियमित आवरण दीवार सफाई से काटे गये व जोड़े गये पत्‍थरों से भलीभांति निर्मित, पंक्‍तिबद्ध तथा अंतत: प्रस्‍तर खंडों को ईंट के परकोटों से जोड़ती थी। सेना के प्रयोग के लिए परकोटों में कई प्रकोष्‍ठ हैं। शिखर पर ईंट की कई संरचनाएँ हैं, जो संभवत: ब्रिटिश अवधि में निर्मित करवाई गई थी। सामरिक महत्‍व के इस स्‍थान पर शिखर पर एक उन्‍मुक्‍त रूप से खड़ा गोलाकार बुर्ज है, जहाँ कई तोपें लगाई गई थीं। यहाँ एक अंग्रेज़ी मूल की तोप भी है, जिसे अब बुर्ज के ऊपर स्थापित किया गया है।

जैसा कि उत्‍कीर्ण लेखों में अंकित है, विजयनगर के शासकों ने शिखर पर मंदिरों का निर्माण करवाया था। इनमें केन्‍द्रीय मंदिर के बारीकी से उत्‍कीर्णित वास्‍तुकलात्‍मक घटकों तथा सांचे में गढ़ी हुई ईंटों से अधिसंरचना की बनावट उल्‍लेखनीय है। नक्‍काशी की शैली से कर्नाटक के सेलखड़ी पत्‍थर पर लुप्‍त होती हुई सुकुमार कलात्‍मक परम्‍पराओं के प्रभावों का स्‍मरण होता है। मंदिर के एक उत्‍कीर्ण लेख में डिंडीगल के 'तांबिरानार'[1] को विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय द्वारा दिए गए दान को दर्ज किया गया है।

समय

यहाँ आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के देखने के लिए यह क़िला प्रात: 9 बजे से शाम के 5:30 बजे तक खुला रहता है।

प्रवेश शुल्क

भारतीय नागरिक और सार्क देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, पाकिस्तान, मालदीव और अफ़ग़ानिस्तान) और बिमस्टेक देशों (बंगलादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाईलेंड और म्यांमार) आदि के पर्यटक पाँच रुपये प्रति व्यक्ति से यहाँ प्रवेश कर सकते हैं। अन्य पर्यटकों से दो अमरीकी डालर या 100 रुपया प्रति व्यक्ति लिया जाता है। पन्द्रह वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. (मुख्‍य देवता)

बाहरी कड़ियाँ

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