जैंतिया जाति  

जैंतिया जाति के लोग मेघालय राज्य की जैंतिया पहाड़ियों के प्राथमिक रूप से निवासी हैं। ये लोग पश्चिम में रहने वाले खासी लोगों की तरह ही भारत के पहले मंगोल प्रवासियों के वंशज माने जाते हैं। जैंतिया लोगों को 'पनार' नाम से भी जाना जाता है।

इतिहास

19वीं शताब्दी तक इन लोगों में प्रशासन की त्रि-स्तरीय प्रणाली थी। ब्रिटिश शासन काल के दौरान यह प्रणाली ख़त्म हो गई और आज़ादी के बाद इसके स्थान पर जनजातीय मामलों की ज़िला परिषद का गठन किया गया और अन्य मामलों की देखरेख के लिए एक भारतीय अधिकारी की नियुक्ति की गई।

कुछ हद तक अलगाव के कारण जैंतिया लोग अपनी मातृ सत्तात्मक संस्कृति को बचाए रखने में काफ़ी हद तक सफल रहे हैं। ये लोग अब भी झूम पद्धति से खेती करते हैं और आलू यहाँ की मुख्य फ़सल है। हालांकि 'भारत सरकार' ने स्थायी कृषि को बढ़ाया देने का प्रयास किया है, जिसमें कुछ हद तक सफलता भी मिली है।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 मेघालय की पनार जनजाति भी करती है दुर्गा पूजा (हिन्दी) खास खबर। अभिगमन तिथि: 09 फरवरी, 2015।

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=जैंतिया_जाति&oldid=519264" से लिया गया