चेतसिंह  

चेतसिंह बनारस का राजा था, जो ईस्ट इंडिया कम्पनी के प्रति निष्ठा रखता था। उसकी मैसूर और मराठों से कभी नहीं बनती थी। वारेन हेस्टिंग्स ने चेतसिंह का सारा राजपाट ज़ब्त करके उसके भतीजे को सौंप दिया था। कम्पनी के साथ हुई सन्धि के अनुसार उसे कम्पनी को सालाना नज़राना देना होता था। चेतसिंह के साथ हेस्टिंग्स का सदा ही क्रूर व्यवहार रहा था। यही कारण था कि हेस्टिंग्स पर पिट के द्वारा महाभियोग चलाया गया था।

चेतसिंह घाट, बनारस

कम्पनी के प्रति निष्ठा

पहले चेतसिंह अवध के नवाब का सामन्त था, लेकिन बाद में उसने अपनी निष्ठा ईस्ट इंडिया कम्पनी के प्रति व्यक्त की। कम्पनी के साथ एक संधि हुई, जिसके अंतर्गत चेतसिंह ने कम्पनी को 22.5 लाख रुपये का सालाना नज़राना देना स्वीकार किया और बदले में कम्पनी ने क़रार किया कि, वह किसी भी आधार पर अपनी माँग नहीं बढ़ायेगी और किसी भी व्यक्ति को राजा के अधिकार में दख़ल देने और उसके देश की शान्ति भंग करने की इजाजत नहीं देगी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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