चिचिंडा  

चिचिंडा

चिचिंडा तेज़ी से बढ़ने वाली तुरई कुल (कुकुरबिटेसी) की दो लताओं (ट्रिकोसेंथीज़ एंगूइना और टी. कुकुमेरोइडीज) में से एक। यह दक्षिण-पूर्वी एशिया और ऑस्ट्रेलिया में मूल रूप से पाया जाता है, लेकिन अपने खाने योग्य और अजीब आकार के फलों के कारण विश्व भर में पैदा किया जाता है।

फल

चिचिंडे के एक पौधे में दो या तीन शाखित प्रतान होते हैं। इसके फूल सफ़ेद रंग के होते हैं, जिनकी पंखुड़ियों पर लंबी धारियाँ होती हैं। 'ट्रिकोसेंथीज़ एंगूइना' में लंबे हल्के धारीदार हरे फल लगते हैं। अक्सर ये फल 1.5 से 2 मीटर तक लंबे रहते हैं, जो प्रत्येक सिरे पर पतले होते हैं। 'टी. कुकुमेरोइडीज' के 5 से 8 से.मी. लंबे अंडाकर फल होते हैं, जिन्हें सुखाने के बाद साबुन के विकल्प के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

मृदा

चिचिंडा की अधिक पैदावार लेने के लिए जीवांश युक्त दोमट रेतीली भूमि अच्छी रहती है। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करनी चाहिए। इसके उपरांत 2-3 बार हैरो या देसी हल चलाया जाता है। पाटा लगाकर मिट्टी भुरभुरी एवं समतल बना ली जाती है।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. चिचिंडा कि उन्नत आर्गनिक जैविक खेती खीरा या कद्दू वर्गीय सब्जियां (हिन्दी) आर्गेनिक भाग्योदय। अभिगमन तिथि: 05 अगस्त, 2014।
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