गोपीनाथ बोरदोलोई  

निधन

गोपीनाथ बोरदोलोई के नेतृत्व में असम प्रदेश में नवनिर्माण की पक्की आधारशिला रखी गई थी, इसलिए उन्हें 'आधुनिक असम का निर्माता' भी कहा जाता है। 5 अगस्त, 1950 ई. में जब वे 60 वर्ष के थे, तब उनका देहांत गुवाहाटी में हो गया। गोपीनाथ बोरदोलोई के प्रयत्नों से ही असम आज भारत का अभिन्न अंग है। ब्रिटिश सरकार ने उस क्षेत्र को अलग करने की योजना बनाई थी। उस समय कांग्रेस 'भारतीय स्वतंत्रता संग्राम' को नेतृत्व कर रही थी। कांग्रेस से सम्बद्ध वही एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने इसे भयंकर षड़यन्त्र समझा और कांग्रेस से इस पर जोर डालने को कहा। इसके अतिरिक्त असम में सरकार बनाने तथा उसकी उन्नति के लिए जो कार्य उन्होंने किए, अन्ततः भारत सरकार ने उन्हीं से प्रभावित होकर इन्हें 1999 में मरणोपरान्त भारत के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 असम के महान् सपूत- गोपीनाथ बोरदोलाई (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 23 जुलाई, 2013।

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