गोकुल बैराज परियोजना  

अस्सी के दशक में उत्तर प्रदेश में मथुरा और गोकुल के मध्य यमुना नदी पर लोअर स्ट्रीम में गोकुल बैराज का निर्माण कराया गया है। इस बैराज निर्माण से पानी का संकलन हुआ और बल्देव क्षेत्र के लिए रास्ता सुगम हुआ। यमुना पार जाने वालों को इससे काफ़ी सहूलियत हुई। यमुना नदी में जनवरी से जून तक प्रवाहित जल की उपलब्धता अत्यल्प होने के कारण आगरा एवं मथुरा-वृंदावन नगरों को पेयजल हेतु पर्याप्त जल नहीं मिल पाता है। इन नगरीय क्षेत्रों में भूमिगत जल अत्यधिक खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं है और इसकी उपलब्धता में भी निरन्तर ह्रास हो रहा है। इस समस्या के निदान हेतु गोकुल के निकट यमुना नदी पर गोकुल बैराज का निर्माण कराया गया है। वर्षा ऋतु के पानी को जलाशय में संचित कर यमुना में जल की कमी की अवधि में आगरा एवं मथुरा-वृंदावन नगरों को सीधे आपूर्ति की जाती है।

जल की उपलब्धता

जलाशय में संचित जल की शुद्धता बनाये रखने हेतु मथुरा एवं वृंदावन नगर की ओर से यमुना नदी में गिर रहे नालों को टेप कर इनका पानी सीवेज सिंचाई हेतु ले जाया जाता है। यह कार्य 'यमुना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड' द्वारा किया जा रहा है। जलाशय में 165 मीटर के स्तर पर जल संचय से मथुरा में स्थित घाटों पर पर्याप्त जल फेलाव उपलब्ध रहता है, जिससे ब्रज भूमि के इस केंद्र बिंदु का सौंदर्य तो द्विगुणित होगा ही, साथ ही साथ धार्मिक अनुष्ठा आदि करने में भी धर्मार्थियों को सुविधा प्राप्त होगी। गोकुल बैराज पर 4 लेन पुल के निर्माण होने से मथुरा शहर में यातायात की भी अत्यधिक सुविधा प्राप्त होगी। अलीगढ़ से दिल्ली एवं भरतपुर जाने वाले वाहन गोकुल बैराज से आ-जा सकते हैं। मथुरा स्थित रिफाइनरी से टेंकरों को अलीगढ़, हाथरस जाने के लिए इस पुल से विशेष सुविधा प्राप्त है। भविष्य में बैराज के समीप उद्यान विकसित होने पर मथुरा निवासियों एवं यात्रियों के लिए गोकुल बैराज एक आकर्षण केंद्र बन सकता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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