गुट निरपेक्ष आन्दोलन  

गुट निरपेक्ष आन्दोलन
16वें गुट निरपेक्ष आन्दोलन की समिति का प्रतीक
विवरण 'गुट निरपेक्ष आन्दोलन' कई राष्ट्रों से बनी एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है। यह विकसित देशों के हितों की तुलना में तृतीय विश्व के देशों की सामूहिक राजनीतिक और आर्थिक चिन्ताओं की अभिव्यक्ति के लिये एक मंच का कार्य करता है।
समन्वयक ब्यूरो न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य
मुख्यालय जकार्ता, इण्डोनेशिया
स्थापना अप्रैल, 1961
सदस्य देश 120 (2012)
अन्य जानकारी गुट निरपेक्ष आन्दोलन भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासर एवं युगोस्लाविया के राष्ट्रपति जोसिप ब्रौज़ टीटो द्वारा शुरू किया गया था।

गुट निरपेक्ष आन्दोलन (अंग्रेज़ी: Non Aligned Movement, संक्षिप्त - NAM) राष्ट्रों की एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है। इस संस्था में सम्मिलित राष्ट्रों का यह उद्देश्य है कि वे किसी भी पावर ब्लॉक के संग या विरोध में नहीं रहेंगे। यह आंदोलन विकसित देशों के हितों की तुलना में तृतीय विश्व के देशों की सामूहिक राजनीतिक और आर्थिक चिन्ताओं की अभिव्यक्ति के लिये एक मंच का कार्य करता है। गुट निरपेक्ष आन्दोलन भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासर एवं युगोस्लाविया के राष्ट्रपति जोसिप ब्रौज़ टीटो द्वारा शुरू किया गया था। इसकी स्थापना अप्रैल, 1961 में हुई थी।

उद्भव एवं विकास

गुट निरपेक्ष आन्दोलन का विकास 20वीं सदी के मध्य में छोटे राज्यों, विशेषकर नये स्वतंत्र राज्यों, के व्यक्तिगत प्रयास से हुआ। ये राज्य अपनी स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये किसी भी महाशक्ति में सम्मिलित नहीं होना चाहते थे। महाशक्ति की अवधारणा तथा नव-साम्राज्यवाद के वर्चस्व के विरुद्ध एक संयुक्त मोर्चा खोलने और द्वितीय विश्वयुद्ध (1945) के बाद शीतयुद्ध क्षेत्रों के इर्द-गिर्द विकसित प्रतियोगी समूहों की व्यवस्था को अस्वीकार करने के लिये 1950 के दशक में नये देशों के व्यक्तिगत प्रयासों को समन्वित करने की प्रक्रिया आरम्भ हुई। इस उद्देश्य से 1955 में बांडुग (इंडोनेशिया) में अफ्रीकी-एशियाई सम्मेलन बुलाया गया, जिसमें छह अफ्रीकी देशों सहित 29 देशों ने भाग लिया। यह सम्मेलन बहुत सफल साबित नहीं हुआ, क्योंकि अनेक देश अपनी विदेश नीतियों की साम्राज्यवाद-विरोधी बैनर तले संचालित करने के लिये तैयार नहीं थे। लेकिन इसने नये स्वतंत्र राज्यों के समक्ष उपस्थित राजनीतिक और आर्थिक असुरक्षा के भय को उजागर किया।[1]

1950 के दशक के अंत में युगोस्लाविया ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गुट-निरपेक्ष राजनीतिक पहचान की स्थापना में रुचि प्रदर्शित की। ये प्रयास 1961 में बेलग्रेड (युगोस्लाविया) में 25 गुट-निरपेक्ष देशों के राज्याध्यक्षों के प्रथम सम्मेलन होने तक जारी रहे। यह सम्मेलन युगोस्लाविया के राष्ट्रपति जोसिप ब्रौज़ टीटो की पहल पर आयोजित हुआ, जिन्होंने शस्त्रों की बढ़ती होड़ से तत्कालीन सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य युद्ध छिड़ सकने की आशंका व्यक्त की थी। बेलग्रेड सम्मेलन में भाग लेने वाले अधिकतर देश एशिया और अफ़्रीका महाद्वीपों के थे। सम्मेलन आयोजित करने में सक्रिय अन्य नेताओं में मिस्र के गमाल अब्दुल नसीर, भारत के जवाहरलाल नेहरू और इण्डोनेशिया के सुकर्णो प्रमुख थे।

गुट निरपेक्ष आन्दोलन का दूसरा सम्मेलन काहिरा (मिस्र) में 1964 में आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में पश्चिमी उपनिवेशवाद और विदेशी सैनिक प्रतिष्ठानों के अवधारण की भर्त्सना की गई। लेकिन, 1960 के दशक की शेष अवधि में आन्दोलन ने एक अस्थायी और आकस्मिक संगठन का रूप ले लिया। गुट-निरपेक्ष देशों के कार्यों को सही दिशा में ले जाने के लिये कोई संस्थागत संरचना मौजूद नहीं थी। नाम का तृतीय सम्मेलन 1970 में लुसाका में हुआ, जिसमें नियमित रूप से गुट-निरपेक्ष राज्यों का सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया। 1973 में अल्जीयर्स में आयोजित चतुर्थ सम्मेलन में दो सम्मेलनों के बीच में गुट-निरपेक्ष राज्यों की सभी गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने के लिये समन्वक ब्यूरो का औपचारिक रूप से गठन किया गया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 गुट निरपेक्ष आन्दोलन (हिन्दी) vivacepanorama.com। अभिगमन तिथि: 16 मई, 2017।
  2. यूगोस्लाविया को 1992 में निलम्बित कर दिया गया। साइप्रस और माल्टा ने 2004 में सदस्यता छोड़ दी।

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=गुट_निरपेक्ष_आन्दोलन&oldid=622516" से लिया गया