ख़य्याम  

ख़य्याम
मोहम्मद ज़हुर 'ख़य्याम' हाशमी
पूरा नाम मोहम्मद ज़हुर 'ख़य्याम' हाशमी
प्रसिद्ध नाम ख़य्याम
जन्म 18 फ़रवरी, 1927
जन्म भूमि जालंधर, पंजाब
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र संगीतकार
मुख्य फ़िल्में फिर सुबह होगी, शोला और शबनम, शगुन, कभी-कभी, उमराव जान, आख़िरी खत
पुरस्कार-उपाधि संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, पद्मश्री
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्ध गीत दूर हटो ऐ दुनिया वालो, रूठ के तुम तो चल दिए, दिल जलता है तो जलने दे, बदली तेरी नज़र तो नज़ारे बदल गए
अन्य जानकारी ख़य्याम बॉलीवुड के ऐसे संगीतकार हैं, जिन्होंने कम फिल्मों में संगीत दिया, मगर उनके गीत और धुनें अमर हैं।
अद्यतन‎

मोहम्मद ज़हुर 'ख़य्याम' हाशमी (अंग्रेज़ी: Mohammed Zahur Khayyam, जन्म: 18 फरवरी, 1927) भारतीय फ़िल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार हैं। ख़य्याम बॉलीवुड के ऐसे संगीतकार हैं, जिन्होंने कम फिल्मों में संगीत दिया, मगर उनके गीत और धुनें अमर हैं। उनके गीत रोजाना आकाशवाणी अथवा टेलीविजन पर किसी न किसी रूप में सुनाए-दिखाए जाते हैं। उन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री में क़रीब 40 साल काम किया और 35 फ़िल्मों में संगीत दिया। ख़य्याम ने शर्माजी नाम से कुछ फिल्मों में संगीत भी दिया है।

जीवन परिचय

ख़य्याम का पूरा नाम है मोहम्मद जहूर ख़य्याम हाशमी। इनका जन्म 18 फ़रवरी, 1927 को पंजाब के जालंधर जिले के नवाब शहर में हुआ था। पूरा परिवार शिक्षित-दीक्षित था। परिवार में कुल चार भाई और एक बहन थे। सबसे बड़े भाई अमीन परिवार का ट्रांसपोर्ट बिजनेस देखते थे। दूसरे भाई मुश्ताक जनरल मैनेजर के पद से रिटायर हुए। तीसरे भाई गुलजार हाशमी शायरी करते थे, लेकिन छोटी उम्र में इंतकाल हो गया। ख़य्याम अपने पिता के चौथे बेटे थे, जो संगीत के शौक के कारण पाँचवीं तक पढ़ाई कर घर से भागना पड़ा।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 कभी-कभी ख़य्याम के दिल में खयाल आता है (हिंदी) वेबदुनिया। अभिगमन तिथि: 19 मई, 2017।

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