खजूर  

खजूर

खजूर (अंग्रेज़ी: Date Palm) पामी (Palmae) कुल के अंतर्गत फीनिक्स (Phoenix) जाति की कई उपजातियों को प्राय: खजूर नाम दिया जाता है। इनमें फीनिक्स डैक्टिलिफेरा (P.dactylifera) और फीनिक्स सिल्वेस्ट्रिस (Sylvestris) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। पहला उत्तरी, अफ़्रीका तथा दक्षिणी-पश्चिमी एशिया का देशज है और सिंध, पंजाब, बलूचिस्तान तथा कई अरब देशों में इसकी खेती की जाती है। इस विदेशी जाति के ताजे पके फल को खजूर, पिंडखजूर तमर या खुर्मा और पके, सूखे फल को छुहारा, खारिक अथवा डेट (Date) कहते हैं। दूसरी जाति का भारतीय खजूर भारत में अनेक जगह लगाया हुआ मिलता है। इसके फल भी पकने पर खाए जाते हैं, परंतु ताड़ी की तरह इससे निकलने वाले खजूरी रस और उससे तैयार किए हुए मद्य तथा गुड़ का प्रचुर उपयोग होता है।[1]

खजूर के वृक्ष

भारतीय खजूर के वृक्ष 30-40 फुट ऊँचे होते हैं। इनका तना गिरी हुई पुरानी पत्तियों के कड़े पत्राधारों से ढका रहता है। पत्तियाँ 12 - 15 फुट तक लंबी, पक्षाकार और पत्रक 6 - 18 इंच तक लंबे तथा 1 इंच तक चौड़े, गुच्छबद्ध तथा नीचे वाले काँटों में परिवर्तित होते हैं। पुष्प छोटे, एकलिंगी, अलग अलग सशाख मंजरियों में निकले हुए रहते हैं, जो आधार पर कड़े पत्रकोशों से ढके रहते हैं। नर मंजरियाँ सघन, श्वेत और सुगंधित तथा नारी मंजरियाँ एवं उनमें लगने वाले फल नारंगपीत वर्ण के होते हैं। फल लगभग एक इंच बड़े, मधुर, परंतु अत्यल्प मज्जावाले होते हैं।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 सिंह, बच्चन “खण्ड- 3”, हिन्दी विश्वकोश (हिन्दी)। भारतडिस्कवरी पुस्तकालय: नागरीप्रचारिणी सभा, वाराणसी, पृष्ठ संख्या- 285-286।
  2. 2.0 2.1 खजूर (हिन्दी) (पी.एच.पी) jkhealthworld.com। अभिगमन तिथि: 3 मई, 2011
  3. 3.0 3.1 पोषक तत्वों से भरपूर खजूर (हिन्दी) (पी.एच.पी) रांची एक्सप्रेस। अभिगमन तिथि: 3 मई, 2011

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