कैलाश मानसरोवर  

कैलाश मानसरोवर (Kailash Mansarovar)

कैलाश मानसरोवर (Kailash Mansarovar) को शिव-पार्वती का घर माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मानसरोवर के पास स्थित कैलाश पर्वत पर शिव-शंभू का धाम है। यही वह पावन जगह है, जहाँ शिव-शंभू विराजते हैं। पुराणों के अनुसार यहाँ शिवजी का स्थायी निवास होने के कारण इस स्थान को 12 ज्येतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। कैलाश बर्फ़ से आच्छादित 22,028 फुट ऊँचे शिखर और उससे लगे मानसरोवर को 'कैलाश मानसरोवर तीर्थ' कहते है और इस प्रदेश को मानस खंड कहते हैं। हर साल कैलाश-मानसरोवर की यात्रा करने, शिव-शंभू की आराधना करने, हज़ारों साधु-संत, श्रद्धालु, दार्शनिक यहाँ एकत्रित होते हैं, जिससे इस स्थान की पवित्रता और महत्ता काफ़ी बढ़ जाती है। कैलाश-मानसरोवर उतना ही प्राचीन है, जितनी प्राचीन हमारी सृष्टि है। इस अलौकिक जगह पर प्रकाश तरंगों और ध्वनि तरंगों का समागम होता है, जो ‘ॐ’ की प्रतिध्वनि करता है। इस पावन स्थल को 'भारतीय दर्शन के हृदय' की उपमा दी जाती है, जिसमें भारतीय सभ्यता की झलक प्रतिबिंबित होती है।[1]

कैलाश पर्वत

कैलाश पर्वत पर ॐ

परम पावन कैलाश पर्वत हिन्दू धर्म में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। हिन्दू धर्म के अनुसार यह भगवान शंकर एवं जगत् माता पार्वती का स्थायी निवास है। कैलास पर्वतमाला कश्मीर से लेकर भूटान तक फैली हुई है। ल्हा चू और झोंग चू के बीच कैलाश पर्वत है जिसके उत्तरी शिखर का नाम कैलाश है। कैलाश पर्वत को 'गणपर्वत और रजतगिरि' भी कहते हैं। कदाचित प्राचीन साहित्य में उल्लिखित मेरु भी यही है। मान्यता है कि यह पर्वत स्वयंभू है। कैलाश पर्वत के दक्षिण भाग को नीलम, पूर्व भाग को क्रिस्टल, पश्चिम को रूबी और उत्तर को स्वर्ण रूप में माना जाता है। कैलाश पर्वत समुद्र सतह से 22,028 फीट ऊँचा एक पत्थर का पिरामिड जैसा है, जिसके शिखर की आकृति विराट शिवलिंग की तरह है। पर्वतों से बने षोडशदल कमल के मध्य यह स्थित है। यह सदैव बर्फ़ से आच्छादित रहता है। इसकी परिक्रमा का महत्त्व कहा गया है। यह हिमालय के उत्तरी क्षेत्र में तिब्बत प्रदेश में स्थित एक तीर्थ है। चूँकि तिब्बत चीन के अधीन है, अतः कैलाश चीन में आता है। जो चार धर्मों तिब्बती धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिन्दू का आध्यात्मिक केन्द्र है। कैलाश पर्वत की चार दिशाओं से एशिया की चार नदियों का उद्गम हुआ है ब्रह्मपुत्र, सिंधु नदी, सतलज व करनाली। कैलाश के चारों दिशाओं में विभिन्न जानवरों के मुख है, जिसमें से नदियों का उद्गम होता है, पूर्व में अश्वमुख है, पश्चिम में हाथी का मुख है, उत्तर में सिंह का मुख है, दक्षिण में मोर का मुख है।[2]

कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. कैलाश मानसरोवर यात्रा:उत्तराखण्ड की प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा (हिन्दी) (पी.एच.पी) merapahadforum.com। अभिगमन तिथि: 20 जनवरी, 2011
  2. कैलाश-मानसरोवर यात्रा (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) वेबदुनिया हिन्दी। अभिगमन तिथि: 20 जनवरी, 2011।
  3. कैलास-मानसरोवर यात्रा (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) आज की ख़बर। अभिगमन तिथि: 20 जनवरी, 2011।
  4. मेघदूत, के पूर्वाद्ध, 60
  5. हिमालय की कन्दराओं में है कैलास-मानसरोवर (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) indlive.com। अभिगमन तिथि: 20 जनवरी, 2011।
  6. 6.0 6.1 कैलास मानसरोवर यात्रा हर हिन्दू का लक्ष्य (हिन्दी) (पी.एच.पी) देशबन्धु। अभिगमन तिथि: 18 मार्च, 2011
  7. कैलाश मानसरोवर यात्रा (हिन्दी) (पी.एच.पी) Haldwani Blogs। अभिगमन तिथि: 18 मार्च, 2011
  8. शिव-पार्वती का घर है कैलाश मानसरोवर (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) धर्म-यात्रा। अभिगमन तिथि: 18 मार्च, 2011

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